
छत्तीसगढ़ की माटी की महक को सात समंदर पार तक पहुंचाने वाली विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनके निधन से पूरे प्रदेश सहित देश-दुनिया के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. इस दुखद घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव उनके गृहग्राम गनियारी पहुंचे. उन्होंने महान लोक गायिका के निवास स्थान पर जाकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किए और परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाया. इसके बाद वे अंतिम यात्रा और दाह संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक वहां मौजूद रहे.
महान गायिका को सम्मान देने के लिए गनियारी के सरकारी स्कूल का बदला जाएगा नाम
श्रद्धांजलि सभा के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए एक बड़ी घोषणा की. उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने जिस गनियारी गांव से अपने जीवन का सफर शुरू किया था, वहां के बच्चों को उनके संघर्ष की कहानी हमेशा याद रहे, इसके लिए गांव के ही शासकीय हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम बदला जाएगा. अब यह विद्यालय “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई व हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” के नाम से जाना जाएगा. सरकार का यह फैसला नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को स्थापित करने में रहा ऐतिहासिक योगदान
शिक्षा मंत्री ने तीजन बाई के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी ओजस्वी आवाज, अनूठी अभिनय शैली और तंबूरे की तान के दम पर पंडवानी जैसी क्षेत्रीय कला को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक खास पहचान दिलाई थी. महाभारत के प्रसंगों को जब वे छत्तीसगढ़ी बोली में गाती थीं, तो विदेशी दर्शक भी मंत्रमुग्ध हो जाते थे. उनका जाना केवल किसी एक कलाकार का जाना नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक सुनहरे और गौरवशाली अध्याय का अंत है जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक संभव नहीं होगी.
विपरीत परिस्थितियों में कला साधना और कड़ा संघर्ष भावी पीढ़ियों को देगा नई राह
डॉ. तीजन बाई का पूरा जीवन लोक कला की रक्षा और उसे संवारने के लिए समर्पित रहा. एक ऐसे दौर में जब महिलाओं के लिए मंच पर आकर प्रस्तुति देना बेहद कठिन माना जाता था, उन्होंने समाज की रूढ़ियों को तोड़ा और कला जगत में अपना एक अलग मुकाम बनाया. शिक्षा मंत्री ने कहा कि उनकी यही कला साधना, कड़ा संघर्ष और ऐतिहासिक उपलब्धियां आने वाले युवाओं और कलाकारों के लिए हमेशा एक मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत का काम करेंगी. कला के प्रति उनका यह निस्वार्थ समर्पण इतिहास के पन्नों में हमेशा दर्ज रहेगा.
राज्य सरकार की तरफ से लोक कलाकार को दी गई सबसे सच्ची और व्यावहारिक श्रद्धांजलि
सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल का नामकरण तीजन बाई के नाम पर करना इस महान विभूति के प्रति सबसे सच्ची श्रद्धांजलि है. इससे स्कूल में पढ़ने वाले ग्रामीण बच्चों के भीतर भी यह आत्मविश्वास जागेगा कि एक छोटे से गांव से निकलकर भी कला और मेहनत के बल पर दुनिया के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों को हासिल किया जा सकता है. शिक्षा विभाग ने इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए विभागीय कागजी कार्रवाई भी तुरंत शुरू कर दी है.



