
Hasdeo Aranya Coal Mining:छत्तीसगढ़ के फेफड़े कहे जाने वाले हसदेव अरण्य के जंगलों पर एक बार फिर संकट के बादल मडराने लगे हैं। वन सलाहकार समिति ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सरगुजा जिले के केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में 1,742.6 हेक्टेयर वन भूमि को कोयला खदान के लिए डायवर्ट करने की पहले चरण की मंजूरी दे दी है। इस नए प्रोजेक्ट के कारण हसदेव के बेहद घने जंगलों से लगभग 4.48 लाख पेड़ों की बलि चढ़ाई जाएगी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अपने डिसीजन सपोर्ट सिस्टम ने इसी क्षेत्र को ‘हाई कंजर्वेशन ज़ोन’ यानी अत्यधिक संवेदनशील और संरक्षित श्रेणी में रखा था। इस खदान का आवंटन राजस्थान सरकार की कंपनी को हुआ है, जबकि इसका व्यावसायिक संचालन अडानी समूह द्वारा किया जाएगा।
कभी नो-गो ज़ोन घोषित था हसदेव, अब राजस्थान के बिजली घरों के लिए खुलेगा खनन का रास्ता
हसदेव अरण्य को पर्यावरण की महत्ता और सघन साल वनों के कारण लंबे समय तक ‘नो-गो ज़ोन’ में रखा गया था, जिसका सीधा मतलब था कि इस क्षेत्र की जैव विविधता को बचाने के लिए यहां कभी खनन नहीं होना चाहिए। लेकिन राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित इस खदान को शुरू करने के लिए नियमों को शिथिल किया गया। वन सलाहकार समिति की बैठक में दलील दी गई कि राजस्थान के छबड़ा और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर साल 24 मिलियन टन से अधिक कोयले की आवश्यकता है। वर्तमान में संचालित परसा और पीईकेबी खदानों से यह जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है, जिसके कारण इस तीसरे बड़े कोल ब्लॉक को हरी झंडी दी गई है।

दो चरणों में 30 साल तक चलेगा प्रोजेक्ट, छोटे पौधों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का दावा
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस विशाल परियोजना को दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण अगले 15 वर्षों तक चलेगा, जिसमें 1001.95 हेक्टेयर वन क्षेत्र में खुदाई की जाएगी। इसके बाद के वर्षों में बाकी बची हुई 740.65 हेक्टेयर जमीन पर काम शुरू होगा। पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे, इसके लिए प्रशासन ने दावा किया है कि पहले पांच सालों में केवल 97,837 पेड़ ही काटे जाएंगे। इसके साथ ही 60 सेंटीमीटर से कम मोटाई वाले लगभग 67 हजार छोटे पेड़ों को आधुनिक मशीनों के जरिए उखाड़कर दूसरी जगहों पर दोबारा रोपने की योजना बनाई गई है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह अव्यावहारिक मान रहे हैं।
लेमरू एलीफेंट कॉरिडोर के पास बढ़ेगा खतरा, मानव और हाथियों के बीच संघर्ष गहराने की आशंका
यह नया कोल ब्लॉक हाथियों के लिए आरक्षित प्रसिद्ध लेमरू एलीफेंट कॉरिडोर के बफर जोन से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सरकारी रिपोर्टों में यह बात दर्ज है कि इस पूरे इलाके में जंगली हाथियों के साथ-साथ स्लॉथ भालू, लकड़बग्घा, तेंदुए और जंगली सूअरों का नियमित बसेरा है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर जंगल कटने से हाथियों का पारंपरिक रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा। जंगल उजड़ने से बेघर हुए हाथी भोजन और पानी की तलाश में आस-पास के रिहायशी गांवों का रुख करेंगे, जिससे ग्रामीण इलाकों में जनहानि, फसलों की तबाही और इंसानों व हाथियों के बीच खूनी संघर्ष की घटनाएं बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी।

ग्राम सभाओं के विरोध प्रस्तावों को किया गया दरकिनार, आदिवासियों के अस्तित्व पर खड़ा हुआ संकट
हसदेव अरण्य का यह इलाका केवल पेड़ों का समूह नहीं है, बल्कि सदियों से यहां निवास कर रहे हजारों मूलनिवासी आदिवासी परिवारों की आजीविका और संस्कृति का आधार भी है। इस परियोजना के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने लंबे समय से मोर्चा खोल रखा है और कई ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति से खनन के खिलाफ कड़े प्रस्ताव पारित किए थे। आदिवासियों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना ही जंगलों को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है। जल, जंगल और जमीन छिन जाने से इन पारंपरिक समाजों के सामने न केवल विस्थापन की समस्या खड़ी होगी, बल्कि उनकी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।

3200 हेक्टेयर खराब भूमि पर वनीकरण की योजना, कार्यकर्ताओं ने कागजी दावों पर उठाए सवाल
जंगल के इस बड़े नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने कागजी तौर पर एक भारी-भरकम योजना तैयार की है। इसके तहत 3,233 हेक्टेयर खराब हो चुकी वन भूमि पर नए सिरे से वृक्षारोपण करने की बात कही गई है。 इसके साथ ही अतिरिक्त 1,217 हेक्टेयर जमीन को भी इस काम के लिए आरक्षित किया गया है。 लेकिन पर्यावरणविदों का स्पष्ट मत है कि सदियों पुराने प्राकृतिक साल जंगलों और उनके भीतर पनपे जटिल ईकोसिस्टम को केवल नए पौधे लगाकर कभी वापस नहीं पाया जा सकता। हसदेव नदी और बांगो बांध का जलग्रहण क्षेत्र होने के कारण इस जंगल का उजड़ना पूरे मध्य भारत के पर्यावरण तंत्र के लिए एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।



