
CG Stray Dog Issue: छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों और खुले में घूमते मवेशियों के बढ़ते खतरे को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जमीनी स्तर पर ठोस काम करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि आवारा पशुओं का नियंत्रण सिर्फ सरकारी कागजों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आम जनता को सड़कों और मोहल्लों में सुरक्षा महसूस होनी चाहिए।
6 महीने में 6 से बढ़कर 34 हुए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर
अदालत के कड़े रुख के बाद राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत किया। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह महीनों में एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटरों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी की गई है। दिसंबर 2025 तक प्रदेशभर में केवल 6 सेंटर काम कर रहे थे, जबकि इस साल जून तक 28 नए केंद्र शुरू किए गए हैं। अब गरियाबंद को छोड़कर प्रदेश के 32 जिलों में कम से कम एक-एक नसबंदी केंद्र चालू हो चुका है, जिससे अभियानों की गति बढ़ी है।
30 हजार से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी, 50 हजार को लगा टीका
शासकीय आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक प्रदेश में 30 हजार 651 आवारा कुत्तों की नसबंदी पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही संक्रमण और बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए 50 हजार 362 कुत्तों को एंटी-रेबीज का टीका लगाया गया है और 42 हजार से अधिक कुत्तों को डी-वॉर्मिंग की दवा दी गई है। राज्य में कुत्तों को सुरक्षित रखने और पकड़ने के लिए 199 शेल्टर होम बनाए गए हैं और दर्जनों डॉग कैचिंग गाड़ियां मैदान में उतारी गई हैं।
स्कूलों की सुरक्षा प्राथमिकता, 250 से ज्यादा रास्ते चिन्हित
बच्चों को आवारा कुत्तों के हमलों से बचाने के लिए 45 हजार से अधिक सरकारी और निजी स्कूलों की घेराबंदी और बाउंड्रीवॉल दुरुस्त की गई है। इसके अतिरिक्त, सड़कों पर मवेशियों की वजह से होने वाले हादसों को रोकने के लिए 251 मुख्य मार्गों को चिन्हित किया गया है। इन जगहों पर गश्त करने वाली टीमें, एंबुलेंस और क्रेन तैनात की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत सड़कों पर गंदगी रोकने के लिए भोजन देने के स्थान भी तय किए गए हैं।
निदान हेल्पलाइन पर आई शिकायतों का हुआ त्वरित समाधान
नागरिकों की सहूलियत के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 1100 और एनएचएआई ने 1033 चालू किया है। जून के अंत तक इन नंबरों पर आवारा मवेशियों और कुत्तों से जुड़ी 9 हजार से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से अधिकांश का निराकरण कर दिया गया है। इसी अवधि में राष्ट्रीय राजमार्गों से 1.5 लाख से अधिक लावारिस पशुओं को हटाकर आश्रय स्थलों में भेजा गया है। इस पूरे अभियान के संचालन के लिए शासन ने 33 करोड़ रुपये से अधिक का बजट स्वीकृत किया है।
अगली सुनवाई में सरकार को देना होगा जिलावार ब्यौरा
मामले की सुनवाई के अंत में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अगली तारीख पर हर जिले की अलग-अलग रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अब सरकार को यह बताना होगा कि किस जिले में कितने एबीसी सेंटर संचालित हैं, कितने मवेशियों को हटाया गया और हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई। अदालत ने साफ कर दिया है कि जब तक सभी जिलों से संतोषजनक और पारदर्शी रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इस मामले की नियमित निगरानी जारी रहेगी।



