VIDEO: गणेश प्रतिमाओं के स्वरूप से छेड़छाड़ पर भड़के हिंदू संगठन, प्रशासन से रोक लगाने की मांग, बजरंग दल और संतों ने दी चेतावनी, देखें वीडियो

Ganesh Chaturthi 2026: गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच राजधानी रायपुर में भगवान गणेश की प्रतिमाओं के आधुनिक स्वरूप को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शहर के मोवा इलाके में मूर्तिकारों द्वारा बनाई जा रही 6 पैक्स और डायनासोर के आकार वाली गणेश प्रतिमाओं पर संत समाज और हिंदूवादी संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। बजरंग दल और संत समाज के प्रतिनिधियों ने मूर्तिकारों की दुकानों पर पहुंचकर निर्माण कार्य का जायजा लिया और स्पष्ट किया कि आस्था के प्रतीक भगवान गणेश के पारंपरिक स्वरूप से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मोवा की दुकानों में संतों और बजरंग दल ने किया निरीक्षण

Raipur News Today: संत समाज के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी राजेश्वरानंद और छत्तीसगढ़ बजरंग दल के संयोजक भूषण साहू की अगुवाई में एक दल मोवा स्थित मूर्तिकारों के पास पहुंचा। वहां बन रही विभिन्न डिजाइनों की मूर्तियों को देखने के बाद उन्होंने कुछ स्वरूपों पर ऐतराज जताया। संतों ने मूर्तिकारों को समझाते हुए कहा कि मूर्तियां बनाते समय सनातन मान्यताओं, शास्त्रों और धार्मिक मर्यादाओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

उग्र आंदोलन की चेतावनी और प्रशासन से कार्रवाई की मांग

विवादित प्रतिमाओं को लेकर संत समाज ने शासन और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। स्वामी राजेश्वरानंद ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले ऐसे प्रयोगों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो संत समाज और हिंदूवादी संगठन सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

देखें वीडियो-

एआई डिजाइन से दूर रहने का प्रयास कर रहे मूर्तिकार

दूसरी ओर स्थानीय मूर्तिकारों का कहना है कि वे स्वयं ऐसे विवादित डिजाइनों से बचने की कोशिश कर रहे हैं। मूर्तिकार यशवंत के मुताबिक कई ग्राहक मोबाइल पर एआई से बनी काल्पनिक तस्वीरें लेकर आते हैं और वैसी ही प्रतिमा बनाने की मांग करते हैं। हालांकि, पिछले साल हुए विवाद के बाद से अधिकांश कारीगर एआई जनरेटेड तस्वीरों के आधार पर मूर्तियां बनाने से परहेज कर रहे हैं ताकि जनभावनाएं आहत न हों।

लाखे नगर के पिछले साल वाले विवाद का असर

रायपुर के लाखे नगर में पिछले वर्ष एआई तकनीक से तैयार की गई एक गणेश प्रतिमा के डिजाइन को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। उस समय हिंदूवादी संगठनों के कड़े विरोध के बाद मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया था। इसी घटना का सबक लेते हुए हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वादिनी पांडेय ने गणेश उत्सव समितियों और कारीगरों से पहले ही अपील की है कि वे एआई या किसी अनपेक्षित बदलाव वाली मूर्तियों की स्थापना न करें।

रायपुर के लाखे नगर में इस गणेश प्रतिमा के स्वरूप को लेकर हुआ था विवाद ।

धार्मिक भावनाएं आहत करने पर कानूनी प्रावधान

प्रतिमाओं के स्वरूप में बदलाव और उससे उपजे विवाद पर कानूनी जानकारों की राय भी सामने आई है। वरिष्ठ अधिवक्ता विराट वर्मा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धर्म या देवी-देवता के प्रति अपमानजनक कार्य करता है जिससे जनभावनाएं आहत होती हैं, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। शिकायत मिलने पर पुलिस प्राथमिक जांच के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।

125 साल पुराना है रायपुर का गणेश उत्सव

इतिहासकारों के मुताबिक रायपुर में सार्वजनिक गणेश उत्सव की परंपरा लगभग 125 वर्ष पुरानी है। शहर की पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी और बनियापारा से शुरू हुई यह परंपरा धीरे-धीरे गोलबाजार, रामसागरपारा और सदर बाजार तक फैल गई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी सार्वजनिक गणेश पांडालों ने लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने और सामाजिक एकजुटता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही कारण है कि स्थानीय लोग इन प्रतिमाओं को केवल एक कलाकृति न मानकर अपनी आस्था और परंपरा का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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