
CSVTU Pharmacy Exam Paper Leak AI Copying: छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) की डी. फार्मेसी परीक्षा में नकल का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा जगत को चौंका दिया है। जांजगीर-चांपा जिले के चार परीक्षा केंद्रों में उड़नदस्ता दल (फ्लाइंग स्क्वॉड) की जांच के दौरान बड़े पैमाने पर सामूहिक नकल और पेपर लीक का भंडाफोड़ हुआ है। जांच में पता चला है कि छात्रों ने पारंपरिक नकल के बजाय मोबाइल फोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेकर अपनी उत्तर पुस्तिकाएं भरीं। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे एक संगठित सिंडिकेट का काम बताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
वॉट्सऐप पर लीक हुए जवाब और AI ऐप का खेल
जांच दल को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि परीक्षा शुरू होने से करीब आधे घंटे पहले ही प्रश्नपत्र और उनके सटीक उत्तर वॉट्सऐप के माध्यम से छात्रों के मोबाइल तक पहुंच गए थे। जब टीम ने कमरों का निरीक्षण किया, तो कई छात्र मोबाइल फोन छिपाकर एआई ऐप की मदद से लंबे उत्तर तैयार करते पाए गए। निरीक्षण टीम ने मौके से कई मोबाइल जब्त किए हैं, जिनमें एआई द्वारा जनरेट किए गए उत्तरों के डिजिटल प्रमाण मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि अधिकांश परीक्षार्थियों के एमसीक्यू (MCQ) उत्तर एक जैसे पाए गए, जो सामूहिक नकल की पुष्टि करते हैं।
सीसीटीवी बंद और केंद्रों से गायब मिले प्राचार्य
परीक्षा केंद्रों में धांधली इस कदर हावी थी कि नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था। जांजगीर-चांपा के केसरी कॉलेज ऑफ फार्मेसी में टीम को सीसीटीवी का डीवीआर तक नहीं सौंपा गया ताकि सबूत मिटाए जा सकें। वहीं, कई केंद्रों पर प्राचार्य नदारद मिले और उनके स्थान पर अनाधिकृत लोग परीक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ज्ञान रोशनी फार्मेसी कॉलेज में तो वीक्षक (इनविजीलेटर) की टेबल से ही 20 पन्नों की नकल सामग्री मिली है। पामगढ़ के एक संस्थान में आठ कमरों की परीक्षा के लिए पर्याप्त स्टाफ तक नहीं था, जिससे छात्रों को नकल करने की पूरी छूट मिली हुई थी।
रायपुर से जुड़ा है पेपर लीक का तार, 500 छात्र संदेह के घेरे में
विश्वविद्यालय की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि लीक हुए प्रश्नपत्र और उनके उत्तर रायपुर से भेजे गए थे। जांच दल ने दावा किया है कि उनके पास इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो और डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। एक केंद्र पर तैनात वीक्षक के मोबाइल से भी हल किए गए एमसीक्यू उत्तर बरामद हुए हैं, जिससे साफ है कि इस खेल में कर्मचारियों की भी मिलीभगत थी। आशंका जताई जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में करीब 500 छात्र शामिल हो सकते हैं।
कुलपति बोले- संगठित गिरोह पर दर्ज होगा मुकदमा
CSVTU के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि दूरस्थ क्षेत्रों के कॉलेजों में एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है। उन्होंने बताया कि चारों कॉलेजों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। विश्वविद्यालय अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से मोबाइल डेटा की जांच कर रहा है ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके। आने वाले दिनों में संबंधित कॉलेजों की संबद्धता रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई भी संभव है।
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