
CG Mukhyamantri Govansh Mobile Chikitsa Yojana: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी इलाकों में रहने वाले पशुपालकों के लिए एक बेहद काम की खबर है। अब अपने किसी मवेशी के अचानक बीमार या घायल होने पर उसे दूर अस्पताल ले जाने की परेशानी से मुक्ति मिल गई है। राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री गोवंश मोबाइल चिकित्सा योजना’ के जरिए केवल एक फोन कॉल पर पशु डॉक्टरों की पूरी टीम दवाइयों के साथ सीधे आपके घर या गौठान तक पहुंच रही है। यह योजना दूर-दराज के गांवों में रहने वाले उन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनके पास बीमार मवेशियों को बड़े पशु चिकित्सालयों तक ले जाने के लिए साधन नहीं होते।
पशुओं की जान बचाना और आजीविका को सुरक्षित करना है योजना का मुख्य उद्देश्य
इस विशेष योजना की शुरुआत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के पशुधन को सुरक्षित रखने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए की गई थी। इस योजना के पीछे छिपे मुख्य उद्देश्यों को इस तरह समझा जा सकता है:
- घर पर चिकित्सा सुविधा: ग्रामीण अंचलों और गौठानों में रहने वाले मवेशियों को उनके रहने के स्थान पर ही तुरंत इलाज मुहैया कराना।
- समय पर आपातकालीन सहायता: गंभीर रूप से घायल, दुर्घटना का शिकार या प्रसव पीड़ा से तंग पशुओं को बिना वक्त गंवाए त्वरित आपातकालीन उपचार देना।
- निशुल्क दवाइयां: मौके पर ही जांच के बाद पशुपालक को बिना किसी शुल्क के जरूरी जीवन रक्षक दवाइयां और इंजेक्शन उपलब्ध कराना।
- संक्रामक बीमारियों से बचाव: गांवों में फैलने वाली पशु बीमारियों की समय पर पहचान कर उन्हें महामारी बनने से रोकना।
मुफ्त डॉक्टर से लेकर पैसों की बचत तक, जानिए इस अनूठी योजना के बड़े फायदे
इस मोबाइल चिकित्सा योजना के धरातल पर उतरने से छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों और पशुपालकों को सीधे तौर पर कई बड़े लाभ मिल रहे हैं:
- भटकने से मुक्ति: अब ग्रामीणों को भारी-भरकम बीमार पशु को गाड़ी में लादकर शहर के अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
- पशुधन का संरक्षण: समय पर इलाज मिलने से मवेशियों की अकाल मौत के मामलों में भारी कमी आई है, जिससे पशुधन सुरक्षित हो रहा है।
- आर्थिक नुकसान से बचाव: डॉक्टरों की फीस और महंगी दवाइयों का खर्च पूरी तरह मुफ्त होने से गरीब किसानों के पैसों की बड़ी बचत हो रही है।
- दूध उत्पादन में बढ़ोतरी: पशुओं के नियमित और समय पर इलाज से उनकी सेहत अच्छी रहती है, जिसका सीधा सकारात्मक असर दूध उत्पादन पर पड़ता है।
- बेसहारा मवेशियों की देखरेख: सड़कों पर घूमने वाले लावारिस और घायल गाय-बैलों को भी इस योजना के तहत रेस्क्यू कर इलाज दिया जा रहा है।
किसान से लेकर गौशाला संचालक तक, हर कोई उठा सकता है इस सरकारी सेवा का लाभ
छत्तीसगढ़ शासन ने इस योजना के दायरे को काफी व्यापक रखा है ताकि समाज के हर वर्ग के मवेशियों को इसका लाभ मिल सके। इस योजना के तहत निम्नलिखित लोग मदद के पात्र हैं:
- स्थानीय किसान और पशुपालक: राज्य का कोई भी पारंपरिक किसान जिसके पास गाय, बैल या भैंस जैसे दुधारू मवेशी हैं।
- गौशाला संचालक: सूबे में संचालित होने वाली सभी पंजीकृत और निजी गौशालाएं जहां बड़ी संख्या में गोवंश मौजूद हैं।
- गौठान समितियां: गांवों और शहरों में मवेशियों के रख-रखाव के लिए बनाई गई सरकारी गौठान समितियों के नोडल सदस्य।
- आम नागरिक: रास्ते में किसी बेसहारा, लावारिस या दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को देखकर उसकी मदद करने की इच्छा रखने वाला कोई भी राहगीर।
केवल 1962 नंबर पर करना होगा कॉल, जानिए वैन बुलाने की बेहद आसान प्रक्रिया
इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने एक बेहद सरल और पारदर्शी प्रक्रिया तय की है, ताकि कम पढ़े-लिखे ग्रामीण भी इसका उपयोग आसानी से कर सकें:
- हेल्पलाइन पर संपर्क: पशु के बीमार या घायल होने पर पशुपालक को सबसे पहले एनिमल इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल करना होता है।
- पूरी जानकारी दर्ज कराना: कॉल सेंटर के प्रतिनिधि को अपने पशु की बीमारी के लक्षण, अपना नाम, मोबाइल नंबर और गांव का सटीक पता बताना होता है।
- मोबाइल यूनिट की रवानगी: सूचना दर्ज होते ही नजदीकी ब्लॉक मुख्यालय से डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ से लैस ‘मोबाइल वेटरनरी यूनिट’ वैन मौके के लिए रवाना हो जाती है।
- मौके पर ही उपचार: डॉक्टर घर पहुंचकर मवेशी की पूरी जांच करते हैं, जरूरत पड़ने पर ड्रेसिंग या प्राथमिक उपचार करते हैं और पूरी दवा देकर केस को क्लोज करते हैं।



