
Sushasan Tihar Bemetara Viral Application: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है। सरकारी आयोजनों में आमतौर पर लोग राशन, सड़क, पानी या पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आवेदन लेकर पहुंचते हैं। लेकिन बेमेतरा में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ के दौरान एक युवक ने आबकारी विभाग को ऐसा अजीबोगरीब आवेदन सौंप दिया, जिसने प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। इस आवेदन में युवक ने मांग की है कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सरकारी शराब दुकानों में बिकने वाली देसी और विदेशी मदिरा की बोतलों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और आबकारी मंत्री की तस्वीरें छापी जाएं।
बेमेतरा के नवागढ़ ब्लॉक का है मामला, युवक का मांग पत्र इंटरनेट पर हुआ वायरल
यह पूरा मामला बेमेतरा जिले के अंतर्गत आने वाले विकासखंड नवागढ़ के ग्राम कुंवारा का है। यहां के रहने वाले सतीश मारकंडे नामक युवक ने सुशासन तिहार के कैंप में पहुंचकर आबकारी विभाग के काउंटर पर बकायदा लिखित में यह आवेदन जमा किया। जैसे ही इस अजीबोगरीब आवेदन की कॉपी बाहर आई, किसी ने इसकी तस्वीर खींचकर इंटरनेट पर डाल दी। देखते ही देखते यह शिकायती पत्र व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर जैसे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया और पूरे अंचल में कौतूहल का विषय बन गया।

जब सरकारी योजनाओं में छपती है फोटो तो शराब की बोतलों पर क्यों नहीं, युवक ने दिया तर्क
आवेदनकर्ता सतीश मारकंडे ने अपने इस अनोखे आवेदन के पीछे एक बेहद दिलचस्प और तीखा तर्क पेश किया है। उसने अपने पत्र में लिखा है कि जिस प्रकार शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, होर्डिंग्स, विज्ञापनों और सरकारी प्रचार सामग्रियों में मुख्यमंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्रियों की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई जाती हैं, ठीक उसी तरह शासन के आबकारी विभाग द्वारा बेची जाने वाली शराब की बोतलों पर भी मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री की फोटो अनिवार्य रूप से अंकित की जानी चाहिए। युवक का कहना है कि जब शराब बेचना भी पूरी तरह से एक शासकीय गतिविधि और राजस्व का जरिया है, तो सभी शासकीय उत्पादों पर एक समान नियम लागू होना चाहिए।
जनता मान रही व्यवस्था पर करारा व्यंग्य, सोशल मीडिया पर छिड़ गई अनोखी बहस
इस अनोखे आवेदन के सार्वजनिक होने के बाद से ही स्थानीय स्तर और सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अधिकांश नागरिक और नेटिजन्स इसे एक गंभीर मांग के रूप में नहीं, बल्कि मौजूदा सरकारी व्यवस्था और शराब बिक्री की नीति पर कसा गया एक करारा व्यंग्य (कटाक्ष) मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह शासन के कामकाज के तौर-तरीकों की तरफ ध्यान आकर्षित करने और अपना विरोध दर्ज कराने का एक बिल्कुल अनूठा और प्रतीकात्मक तरीका है, जिसने बिना किसी हुड़दंग के पूरी व्यवस्था को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
पत्रकार ने फोन कर ली वास्तविकता की जानकारी, युवक ने खुद स्वीकार की आवेदन देने की बात
शुरुआत में कई लोगों को लगा कि यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा कोई फर्जी या एडिटेड पत्र है। मामले की जमीनी हकीकत और पुष्टि जानने के लिए स्थानीय मीडिया कर्मियों ने पत्र में लिखे मोबाइल नंबर पर सीधा संपर्क साधा। बातचीत के दौरान ग्रामीण सतीश मारकंडे ने पूरी जिम्मेदारी के साथ स्वीकार किया कि यह आवेदन उसने खुद अपनी मर्जी से सुशासन तिहार के दौरान संबंधित विभाग के अधिकारियों को सौंपा है। युवक ने कहा कि उसने अपनी मांग पूरी तरह होश-ओ-हवास में प्रशासनिक मंच पर रखी है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
आबकारी विभाग के आधिकारिक जवाब का इंतजार, मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश
इस हाईप्रोफाइल और असहज करने वाले आवेदन के जमा होने के बाद से ही बेमेतरा जिला प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारी बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। जिले के वरिष्ठ आबकारी अधिकारियों से जब इस संबंध में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस वायरल हो चुके आवेदन पर आबकारी विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक लिखित जवाब जारी किया जाता है, या फिर इसे एक सामान्य मजाक मानकर फाइलों के नीचे दबा दिया जाता है।



