
LPG Cost India Gas Price: पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। हालत यह है कि भारत में एक सामान्य घरेलू रसोई गैस सिलेंडर को तैयार करने और उसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की वास्तविक लागत अब 1600 रुपये के आंकड़े को भी पार कर गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में बिकने वाले हर एक सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस भारी-भरकम घाटे का बोझ आम जनता पर डालने के बजाय भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां खुद संभाल रही हैं ताकि आम आदमी की रसोई का बजट न बिगड़े।
होर्मुज स्ट्रेट में मचे बवाल से बढ़े दाम, सऊदी अरामको के रेट में 46 फीसदी का तगड़ा उछाल
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों के बढ़ने के पीछे समुद्री व्यापारिक रास्तों का विवाद है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी वजह से सऊदी अरामको के एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में फरवरी के मुकाबले अब तक तकरीबन 46 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है।
- फरवरी का रेट: वैश्विक बाजार में गैस की कीमत 542.50 अमेरिकी डॉलर प्रति टन थी।
- अप्रैल का रेट: बढ़कर सीधे 775 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई।
- जून का रेट: कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा और यह 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन पर आ गई।
विदेशों से आने वाली एलपीजी के इसी महंगे रेट के कारण भारत में इसकी लैंडिंग कॉस्ट काफी ज्यादा बढ़ गई है।
दुनिया के बड़े देशों के मुकाबले भारत में सबसे सस्ती है गैस, उज्ज्वला कार्डधारकों को मिल रही भारी छूट
वैश्विक स्तर पर मचे इस हाहाकार के बावजूद भारत सरकार ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखा है। वर्तमान में देश की राजधानी दिल्ली में एक आम सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं को 942 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं, जो इसकी वास्तविक लागत से करीब 700 रुपये कम है। वहीं गरीब परिवारों को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दी जाने वाली राहत भी जारी है।
- सालाना सीधी सब्सिडी: उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को साल के पहले चार रिफिल पर 300 रुपये की सीधी सब्सिडी बैंक खाते में मिलती है।
- उज्ज्वला सिलेंडर की कीमत: इस छूट के बाद इन परिवारों को एक गैस सिलेंडर महज 642 रुपये में मिलता है।
- वैश्विक बचत: यह कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार की वास्तविक लागत के मुकाबले लगभग 60 प्रतिशत तक कम है।
तेल कंपनियों को हुआ 60 हजार करोड़ का नुकसान, भरपाई के लिए कैबिनेट ने दी 30 हजार करोड़ की मंजूरी
लागत और बिक्री मूल्य के बीच बढ़ते इसी अंतर के कारण हाल ही में आम उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की मामूली बढ़ोतरी भी करनी पड़ी थी। इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों का कुल वित्तीय घाटा बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इस बड़े आर्थिक संकट को देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने सरकारी खजाने से तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भविष्य में गैस की किल्लत को रोकने के लिए भारत ने अपनी निर्भरता बदलते हुए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए देशों से भी एलपीजी का आयात शुरू कर दिया है।
पड़ोसी मुल्कों और पश्चिमी देशों से बहुत बेहतर है हमारी स्थिति, देखें पूरी प्राइस लिस्ट
भारत सरकार द्वारा दी जा रही भारी-भरकम सब्सिडी के कारण देश में गैस के दाम नियंत्रण में बने हुए हैं। अगर हम अपने आस-पास के पड़ोसी देशों और दुनिया के अन्य विकसित देशों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की तुलना करें, तो वहां के नागरिकों को काफी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं:
- पाकिस्तान: एक घरेलू सिलेंडर की कीमत 1,046 रुपये है।
- नेपाल: गैस सिलेंडर के लिए 1,207 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
- बांग्लादेश: एलपीजी सिलेंडर का दाम 1,225 रुपये पर है।
- श्रीलंका: एक सिलेंडर की कीमत 1,241 रुपये तक पहुंच चुकी है।
- अमेरिका: विकसित देश होने के बावजूद यहां गैस की कीमत 1,755 रुपये है।
- ऑस्ट्रेलिया: यहां प्रति सिलेंडर के लिए 1,765 रुपये देने पड़ते हैं।
- कनाडा: दुनिया में सबसे महंगी गैस में शामिल, यहां कीमत 2,411 रुपये है।
गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए ओटीपी डिलीवरी सिस्टम मजबूत, मंत्रालय ने दी खास सलाह
घरेलू रसोई गैस के कमर्शियल मार्केट में होने वाले अवैध इस्तेमाल और चौतरफा चोरी को रोकने के लिए भी सरकार सख्त हो गई है। मंत्रालय ने पूरे देश में ओटीपी (OTP) आधारित डिलीवरी सिस्टम का दायरा बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक कर दिया है ताकि सही उपभोक्ता तक ही सिलेंडर पहुंचे। इसके अलावा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आम नागरिकों से भी एक विशेष अपील की है। मंत्रालय का कहना है कि संकट के इस दौर में लोग ऊर्जा की बचत करने वाले खाना पकाने के तरीकों को अपनाएं ताकि गैस की खपत को कम किया जा सके और देश के आर्थिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।



