बिरनपुर हिंसा मामला: कोर्ट ने 17 आरोपियों को किया दोषमुक्त, छत्तीसगढ़ की इस बड़ी खबर की हर डिटेल

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आज की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में जिला न्यायालय ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने इस मामले के 17 आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बड़ी राहत दी है। इस फैसले के बाद से पूरे इलाके में एक बार फिर बिरनपुर की चर्चा तेज हो गई है क्योंकि यह मामला राज्य की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने के लिए बेहद संवेदनशील रहा है।

कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपियों को किया बरी

अपर सत्र न्यायाधीश साक्षी दीक्षित की अदालत में इस पूरे मामले की सुनवाई हुई। बिरनपुर हिंसा को लेकर साजा थाने में कुल 173 लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें हत्या और दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराएं शामिल थीं। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 64 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सभी सबूतों और गवाहों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ ठोस प्रमाण की कमी है। इसी आधार पर संदेह का लाभ देते हुए सभी 17 आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया गया।

इन आरोपियों को मिली अदालत से बड़ी राहत

अदालत ने जिन लोगों को दोषमुक्त किया है उनमें डकेश्वर सिन्हा, मनीष वर्मा, समारू नेताम, पूरन पटेल और राजकुमार निषाद जैसे नाम शामिल हैं। इनके अलावा भोला निषाद, दूधनाथ साहू, अरुण रजक, चंदन साहू और होमेन्द्र नेताम को भी बरी कर दिया गया है। लिस्ट में टाकेन्द्र साहू, राम निषाद, संजय कुमार साहू, चिंताराम साहू, लोकेश साहू, वरुण साहू और राजेश साहू के नाम भी हैं। यह सभी आरोपी बेमेतरा और आसपास के गांवों के रहने वाले हैं जिन्हें पुलिस ने घटना के बाद गिरफ्तार किया था।

दो बच्चों की लड़ाई से शुरू हुआ था बिरनपुर का खूनी खेल

बिरनपुर हिंसा की शुरुआत बेहद मामूली बात से हुई थी। दो बच्चों के बीच हुई लड़ाई ने देखते ही देखते दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प का रूप ले लिया था। 8 अप्रैल 2023 को यह विवाद इतना बढ़ गया कि वर्तमान विधायक ईश्वर साहू के बेटे भुनेश्वर साहू की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। भीड़ ने भुनेश्वर को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। इस एक घटना ने पूरे प्रदेश में तनाव का माहौल पैदा कर दिया था।

हिंसा की आग और छत्तीसगढ़ बंद का असर

भुनेश्वर साहू की हत्या के बाद हालात काफी बिगड़ गए थे। 10 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का ऐलान किया था जिसका असर पूरे राज्य में देखा गया। गांव में आगजनी की घटनाएं हुईं और इसी दौरान मुस्लिम समुदाय के रहीम और उनके बेटे ईदुल मोहम्मद की भी हत्या हो गई। प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए बिरनपुर में करीब दो हफ्तों तक धारा 144 लागू करनी पड़ी थी। पुलिस ने पहले 12 लोगों को पकड़ा था लेकिन बाद में जांच का दायरा बढ़ता गया।

सीबीआई की चार्जशीट में हुए थे कई बड़े खुलासे

इस संवेदनशील मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में बताया था कि भीड़ ने न केवल भुनेश्वर साहू पर हमला किया बल्कि पुलिस टीम पर भी पथराव किया था। जब सब इंस्पेक्टर बिनुराम ठाकुर अपनी टीम के साथ भुनेश्वर को बचाने पहुंचे तो भीड़ ने उन पर भी हमला कर दिया था। इस हमले में पुलिस अधिकारी बेहोश हो गए थे। सीबीआई ने अपनी जांच में पाया था कि भुनेश्वर की पिटाई मस्जिद के पास वाली गली में की गई थी जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हुई थी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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