
Balodabazar Double Murder Case: छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है जो प्रदेश के कानूनी इतिहास में मिसाल बन गया है। बलौदाबाजार जिले के एक जघन्य दोहरे हत्याकांड के दोषी को कोर्ट ने ‘डबल’ आजीवन कारावास की सजा दी है। यह छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा मामला है जहां किसी अपराधी को दो बार उम्रकैद की सजा साथ-साथ नहीं बल्कि अलग-अलग भुगतने का आदेश दिया गया है। लिव-इन रिलेशन से उपजे इस विवाद और हत्याकांड ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था।
भदरा गांव में मिला था मां-बेटी का शव
इस खौफनाक वारदात की शुरुआत जुलाई 2024 में बलौदाबाजार के भदरा गांव से हुई थी। पुलिस ने गांव के एक घर से संतोषी साहू और उसकी बेटी ममता साहू के शव बरामद किए थे। हत्यारे ने न केवल दोनों की जान ली बल्कि पहचान छिपाने के लिए शवों को जलाने की कोशिश भी की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि दोनों की मौत धारदार हथियार के वार और गला घोंटने की वजह से हुई थी। वारदात के समय घर का मुखिया बाहर था जिसका फायदा उठाकर हत्यारे ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया।

कॉल डिटेल और लोकेशन ने खोला राज
शुरुआत में यह मामला पूरी तरह उलझा हुआ था लेकिन बलौदाबाजार पुलिस की तफ्तीश जैसे ही वैज्ञानिक साक्ष्यों की ओर बढ़ी वैसे ही कड़ियां जुड़ने लगीं। मृतका संतोषी के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स खंगालने पर पता चला कि घटना से ठीक पहले उसकी लंबी बातचीत दिलहरण कश्यप नाम के शख्स से हुई थी। तकनीकी जांच और टावर लोकेशन के आधार पर पुलिस को पुख्ता सबूत मिले कि वारदात के समय दिलहरण मौके पर ही मौजूद था। शक गहराते ही पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी।
आरोपी दिलहरण कश्यप की गिरफ्तारी और कबूलनामा
पुलिस ने घेराबंदी कर संदिग्ध दिलहरण कश्यप को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी ज्यादा देर तक पुलिस को गुमराह नहीं कर सका और उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई टंगिया (कुल्हाड़ी) और खून से सने कपड़े बरामद किए। इसके साथ ही एक दर्जन से ज्यादा गवाहों ने मृतका और आरोपी के बीच संबंधों की पुष्टि की जिससे पुलिस का केस और भी मजबूत हो गया।
गला घोंटने और संघर्ष के मिले थे निशान
अस्पताल से मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने अभियोजन पक्ष के दावों को और पुख्ता कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार मां और बेटी की मौत दम घुटने से हुई थी। शवों के परीक्षण में यह भी पाया गया कि मरने से पहले दोनों ने अपनी जान बचाने के लिए हत्यारे से कड़ा संघर्ष किया था। उनके शरीर पर मिले चोट के निशान उस भयावह मंजर की गवाही दे रहे थे जो उस रात उस घर के भीतर घटा था।
सबूत मिटाने की कोशिश भी आई सामने
अदालत में सुनवाई के दौरान यह बात भी उजागर हुई कि आरोपी ने हत्या के बाद घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने का हर संभव प्रयास किया था। पुलिस ने मौके से ताला काटने के औजार और जले हुए दस्तावेज बरामद किए थे। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को केवल हत्या ही नहीं बल्कि सबूतों को नष्ट करने की धारा 201 के तहत भी दोषी पाया। जांच टीम की सूक्ष्म पड़ताल ने आरोपी के बचने का हर रास्ता बंद कर दिया था।
भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में सजा
इस मामले की पैरवी सरकारी वकील ने बेहद मजबूती से की जिससे आरोपी का दोष सिद्ध करना आसान हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया। उन्होंने दोषी दिलहरण कश्यप को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (दो बार) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समाज में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलना जरूरी है।
डबल आजीवन कारावास का मतलब और प्रभाव
अदालत ने दोषी को जो ‘डबल’ आजीवन कारावास की सजा सुनाई है उसका तकनीकी मतलब बहुत बड़ा है। इसका अर्थ यह है कि दोषी को अपनी दोनों सजाएं एक के बाद एक काटनी होंगी। इस तरह के फैसले के बाद अपराधी के लिए जेल से जल्दी रिहा होने या किसी भी प्रकार की कानूनी राहत मिलने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। बलौदाबाजार पुलिस की इस कामयाबी और अदालत के इस कड़े रुख की पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है।



