
Raipur NSUI CM House Protest: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज छात्र राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है। प्रदेश के कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव फिर से शुरू कराने की मांग को लेकर एनएसयूआई (NSUI) ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का एलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए राज्य के कोने-कोने से छात्र नेता और कार्यकर्ता रायपुर पहुंचे हैं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं का जोश देखते ही बन रहा है, जहाँ कुछ छात्र पोस्टर लेकर बुलडोजर पर चढ़ गए, तो वहीं संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत क्रेन से माला पहनाकर किया गया।

महिला थाना चौक पर जुटे कार्यकर्ता, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आंदोलन की शुरुआत के लिए महिला थाना चौक के पास एक विशाल मंच तैयार किया गया है। यहाँ सुबह से ही कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। एनएसयूआई के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्तों पर पुलिस ने चार स्तर (4 लेयर) की बैरिकेडिंग की है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े।
साल 2017 से कॉलेजों में थमी हुई है चुनावी प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ में छात्र संघ चुनाव का मुद्दा काफी पुराना है। 23 अगस्त 2017 को तत्कालीन सरकार ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का हवाला देते हुए चुनावों पर रोक लगा दी थी। उस समय कुलपतियों की एक रिपोर्ट को आधार बनाया गया था, जिसमें कहा गया था कि चुनाव की वजह से शिक्षण संस्थानों का माहौल खराब होता है और छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है। तब से लेकर अब तक प्रदेश के किसी भी सरकारी कॉलेज में नियमित चुनाव नहीं हुए हैं।
मनोनयन पद्धति का विरोध और चुनाव बहाली की मांग
चुनावों पर रोक लगने के बाद से प्रदेश में ‘मनोनयन पद्धति’ लागू है। इसके तहत कॉलेज प्रबंधन मेरिट के आधार पर छात्र प्रतिनिधियों का चयन करता है। एनएसयूआई का आरोप है कि यह प्रक्रिया छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि मनोनयन प्रणाली से जमीनी स्तर के छात्र नेताओं को मौका नहीं मिल पा रहा है, इसलिए लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट के दायरे में रहकर दोबारा प्रत्यक्ष चुनाव कराए जाने चाहिए।

भारी घेराबंदी के बीच प्रदर्शन, प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें
सीएम हाउस घेरने की जिद पर अड़े कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं, एनएसयूआई के नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं देती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस प्रदर्शन की वजह से शहर के मध्य इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ है।



