
Cockroach Janta Party: सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में इन दिनों एक अजीबोगरीब नाम तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है और वह नाम है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी)। इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और मीम पेजों पर इस डिजिटल संगठन को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। शुरुआत में इसे महज एक आम इंटरनेट मजाक समझा जा रहा था, लेकिन देखते ही देखते इस मुहिम ने एक बड़े डिजिटल आंदोलन का रूप ले लिया है। आलम यह है कि इस काल्पनिक पार्टी के नाम से बाकायदा एक वेबसाइट लॉन्च हो चुकी है, जिस पर अब तक दो लाख से अधिक लोग सदस्यता के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। वहीं इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स का आंकड़ा 40 लाख को पार कर गया है।
जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी से भड़का युवाओं का गुस्सा, इसी विवाद से हुआ पार्टी का जन्म
इस अनोखे डिजिटल आंदोलन की शुरुआत देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के एक कथित बयान के बाद हुई। सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई जिसमें कहा गया कि जस्टिस सूर्यकांत ने व्यवस्था की आलोचना करने और सोशल मीडिया पर राय देने वाले देश के युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से की है। हालांकि बाद में विवाद बढ़ता देख खुद जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर अपनी सफाई जारी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया के एक धड़े ने अदालती कार्यवाही के दौरान कही गई उनकी बात को पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर और गलत संदर्भ में देश के सामने पेश किया है।

जानिए कौन हैं सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, क्या है उनका राजनीतिक कनेक्शन
इंटरनेट पर तेजी से पैर पसार रही इस कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे 30 साल के एक युवा का दिमाग है, जिनका नाम अभिजीत दीपके है। अभिजीत मूल रूप से सोशल मीडिया रणनीतियों के जानकार हैं और साल 2020 से 2023 के बीच वे आम आदमी पार्टी (आप) की सोशल मीडिया टीम के लिए बतौर वॉलंटियर काम भी कर चुके हैं। वर्तमान में वह भारत से दूर अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस विषय में मास्टर्स की डिग्री ले रहे हैं। अभिजीत ने देश के युवाओं के भीतर सिस्टम के प्रति पनप रहे गुस्से को भांपकर 16 मई को एक्स पर एक गूगल फॉर्म शेयर किया था, जो बाद में वायरल हो गया।
संविधान के संरक्षक के मुंह से ऐसी बात ठीक नहीं, डिजिटल क्रिएटर ने बताई नाम रखने की वजह
पार्टी के नाम को लेकर जब अभिजीत दीपके से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसके पीछे की पूरी कहानी बताई। अभिजीत के मुताबिक जब उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश स्तर के कानूनी मंचों से युवाओं के लिए कथित तौर पर कॉकरोच जैसे शब्दों का इस्तेमाल होते देखा, तो उन्हें यह बेहद हास्यास्पद और दुखद लगा। उनका कहना है कि जो न्यायपालिका देश के नागरिकों को संविधान के तहत अभिव्यक्ति की आजादी देती है, वहीं से ऐसी बातें आना परेशान करने वाला है। उन्होंने तय किया कि अगर युवाओं की वाजिब आवाज उठाने पर उन्हें व्यवस्था द्वारा कॉकरोच समझा जाता है, तो वे इसी नाम को अपनी पहचान बना लेंगे।
‘आलसी और बेरोजगारों की आवाज’ बनी टैगलाइन, वेबसाइट पर लिखा तीखा संदेश
कॉकरोच जनता पार्टी ने युवाओं के बीच पैठ बनाने के लिए एक बेहद अनोखी और तंज से भरी टैगलाइन चुनी है। पार्टी खुद को ‘आलसी और बेरोजगारों की बुलंद आवाज’ बताती है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर सीधे तौर पर व्यवस्था और देश के राजनीतिक ढांचे पर निशाना साधा गया है। वेबसाइट के होमपेज पर लिखा गया है कि यह मंच उन आम नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें मौजूदा सिस्टम ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। इसके साथ ही एक तीखा कटाक्ष करते हुए लिखा गया है कि हम यहां सरकारी भ्रष्टाचार को रणनीतिक खर्च बताकर उसका बचाव करने नहीं आए हैं, हम बस यह पूछना चाहते हैं कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा आखिर गया कहां।

कैबिनेट में महिलाओं को आधा हक और दल-बदलुओं पर बैन, ऐसा है पार्टी का अनोखा मैनिफेस्टो
इस पार्टी का चुनावी घोषणापत्र (मैनिफेस्टो) बेहद दिलचस्प है, जिसमें गंभीर राजनीतिक सुधारों को हल्के-फुल्के व्यंग्यात्मक लहजे में पिरोया गया है। इसके घोषणापत्र की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- देश की केंद्रीय कैबिनेट और राज्य सरकारों के मंत्रिमंडलों में महिलाओं को अनिवार्य रूप से 50 फीसदी आरक्षण दिया जाए।
- निजी स्वार्थ के लिए बार-बार राजनीतिक दल बदलने वाले सांसदों और विधायकों पर 20 साल का सख्त चुनावी प्रतिबंध लगाया जाए।
- सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को रिटायरमेंट के तुरंत बाद राज्यसभा सांसद या कोई अन्य सरकारी पद देने की प्रथा पर पूरी तरह रोक लगे।
- देश की परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोका जाए, जिसके तहत पार्टी ने हालिया नीट (NEET) परीक्षा विवाद से प्रभावित छात्रों का खुलकर समर्थन किया है।
महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद भी हुए शामिल, इंटरनेट पर मशहूर हस्तियों ने लिए मजे
सीजेपी की लोकप्रियता को हवा तब और मिल गई जब देश के बड़े राजनेताओं ने भी इसके सोशल मीडिया हैंडल के साथ मजाकिया अंदाज में बातचीत शुरू कर दी। तृणमूल कांग्रेस की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व क्रिकेटर व नेता कीर्ति आजाद ने एक्स पर इस पार्टी के पोस्ट्स को रीट्वीट किया। कीर्ति आजाद ने तो बकायदा ट्वीट करके पूछा कि इस कॉकरोच पार्टी की सदस्यता लेने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए। इस पर पार्टी के आधिकारिक हैंडल से जवाब दिया गया कि आपका साल 1983 का क्रिकेट वर्ल्ड कप विजेता होना ही हमारे लिए सबसे बड़ी और पर्याप्त योग्यता है।
क्या वाकई चुनाव लड़ेगी कॉकरोच जनता पार्टी, या महज एक सोशल मीडिया मीम बनकर रह जाएगी
इस डिजिटल कैंपेन के तेजी से बढ़ते ग्राफ को देखकर अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यह संगठन भविष्य में एक वास्तविक राजनीतिक दल का रूप लेगा। हालांकि इसके चांस बेहद कम हैं। खुद संस्थापक अभिजीत के मुताबिक, सदस्य बनने के लिए व्यक्ति का हमेशा ऑनलाइन रहने वाला, बेरोजगार और अपने गुस्से को रचनात्मक तरीके से मीम्स के जरिए जाहिर करने में सक्षम होना जरूरी है। यह साफ तौर पर जाहिर करता है कि यह पूरा आंदोलन इंटरनेट कल्चर का एक हिस्सा है, जिसने देश के युवाओं को सिस्टम की खामियों पर खुलकर, लेकिन बिना किसी हिंसा के अपनी बात रखने का एक बिल्कुल नया और अनूठा जरिया दे दिया है।



