CG Education Department Bilaspur: फर्जी वेतन आहरण से सरकारी खजाने को लगाई चपत: बिलासपुर शिक्षा विभाग में 30 लाख का गबन, एक गिरफ्तार

CG Education Department Bilaspur: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग के भीतर भ्रष्टाचार का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। कोटा विकासखंड में पदस्थ एक चपरासी (भृत्य) को नियम विरुद्ध तरीके से लाखों रुपये का भत्ता बांट दिया गया। सरकारी खजाने में सेंधमारी का यह खेल करीब एक साल तक चलता रहा, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से शासन को लाखों रुपये की चपत लगाई गई। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता अभी भी फरार है।

वर्दी धुलाई के नाम पर खाते में डाले 29 लाख रुपये

कोटा थाना क्षेत्र में उजागर हुए इस फर्जीवाड़े में सबसे चौंकाने वाली बात भत्तों का वितरण है। जांच में पता चला है कि तत्कालीन अधिकारियों ने एक मामूली भृत्य के खाते में ‘वर्दी धुलाई’ और अन्य सुविधाओं के नाम पर भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की। सितंबर 2024 से लेकर नवंबर 2025 के बीच किस्तों में कुल 29 लाख 62 हजार 222 रुपये निकाले गए। एक चपरासी को हर महीने 4 लाख से 4.50 लाख रुपये तक का भुगतान किया जाना सरकारी नियमों के लिहाज से नामुमकिन है, फिर भी यह खेल महीनों तक चलता रहा।

फर्जी वेतन आहरण से सरकारी खजाने को लगाई चपत

शिक्षा विभाग में हुए इस गबन की शिकायत 3 मार्च 2026 को नरेंद्र प्रसाद मिश्रा ने दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 नवल सिंह पैकरा और भृत्य देवेंद्र कुमार पालके ने मिलकर इस जालसाजी को अंजाम दिया। इन लोगों ने मिलीभगत कर फर्जी वेतन बिल तैयार किए और सरकारी बजट को अपने निजी खातों में डायवर्ट कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2024 से फरवरी 2025 तक करीब 25 लाख और उसके बाद नवंबर 2025 तक साढ़े चार लाख रुपये से अधिक की राशि हड़पी गई।

पुलिस ने एक आरोपी को दबोचा, दूसरा अब भी फरार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर ‘प्रहार अभियान’ के तहत आरोपियों की तलाश के लिए साइबर सेल की मदद ली गई। मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 38 वर्षीय देवेंद्र कुमार पालके को धरमपुरा इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, मुख्य आरोपी नवल सिंह पैकरा पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहा।

बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस घोटाले की आंच शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों तक भी पहुंच रही है। शिकायतकर्ता और कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ने इस मामले में तत्कालीन बीईओ और वर्तमान प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय टांडे सहित जूनियर ऑडिटर सुनील यादव पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि बिना वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति या उनकी अनदेखी के इतना बड़ा भुगतान संभव नहीं था। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े की फाइलें किन-किन टेबल से होकर गुजरी थीं।

साइबर सेल और पुलिस टीम की सक्रियता से हुआ खुलासा

फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए कोटा पुलिस ने विशेष टीम गठित की है। पुलिस टीम ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी है। इस पूरी कार्रवाई में कोटा थाना प्रभारी और उनकी टीम ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मुख्य आरोपी नवल सिंह पैकरा को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ विभाग में मची खलबली

शिक्षा विभाग में इस फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। चपरासी के खाते में लाखों रुपये ट्रांसफर होने की बात जैसे ही सार्वजनिक हुई, विभाग के ऑडिट सिस्टम पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रशासन अब कोटा विकासखंड के पिछले दो वर्षों के सभी वित्तीय लेन-देन की समीक्षा करने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि यदि गहराई से जांच हुई तो भ्रष्टाचार के कुछ और मामले सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही है।

Also Read: शिक्षा विभाग में गजब का खेल: बाबू ने खुद को बनाया ‘लेक्चरर’ और डकार गया 13 लाख, महीनों तक नहीं लगी भनक

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button