
कोरबा: छत्तीसगढ़ में कड़ाके की सर्दी अब जानलेवा साबित होने लगी है। प्रदेश में पिछले 28 दिनों के भीतर ठंड से मौत का तीसरा मामला सामने आया है। ताजा घटना कोरबा जिले की है, जहां सरईसिंगार निवासी 55 वर्षीय हरप्रसाद भैना की लाश कसईपाली के एक यात्री प्रतीक्षालय में मिली। जानकारी के अनुसार, हरप्रसाद मंगलवार को पास के गांव रलिया में एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। वहां से पैदल घर लौटते समय थकान होने के कारण वे प्रतीक्षालय में ही सो गए। रात भर चली सर्द हवाओं और गिरते तापमान को उनका शरीर सह नहीं पाया और उनकी मौत हो गई। पुलिस को मृतक की जेब से मिले पर्स के आधार पर उनकी पहचान हुई है। हालांकि मौत की आधिकारिक पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी।
तापमान में भारी गिरावट: मैनपाट में पारा 1.8 डिग्री पर पहुंचा, रायपुर और दुर्ग में भी लोग ठिठुरने को मजबूर
प्रदेश के कई जिलों में कड़ाके की ठंड और कोहरे का असर साफ देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के इलाकों में शीतलहर (Cold Wave) चलने की चेतावनी जारी की है। पहाड़ी इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है; मैनपाट में न्यूनतम तापमान 1.8 डिग्री तक गिर गया है, जबकि अंबिकापुर में यह 3.3 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी रायपुर में भी पारा 6.6 डिग्री तक लुढ़क गया है। दुर्ग, राजनांदगांव और पेंड्रा जैसे शहरों में भी रात का तापमान 8 डिग्री के आसपास बना हुआ है। उत्तरी छत्तीसगढ़ से आ रही बर्फीली हवाओं ने मैदानी इलाकों में भी ठिठुरन बढ़ा दी है।
हाइपोथर्मिया का बढ़ता खतरा: अंबिकापुर में खुले में सो रहे लोगों की गई जान, शरीर का तापमान गिरने से हो रही मौतें
ठंड से होने वाली मौतों का मुख्य कारण ‘हाइपोथर्मिया’ को माना जा रहा है। इससे पहले अंबिकापुर में दो लोगों की जान जा चुकी है। नए साल की रात श्रीगढ़ में एक बुजुर्ग का शव पैरावट में अकड़ा हुआ मिला था, जो कम कपड़ों में खुले में सो गए थे। शरीर का तापमान सामान्य से बहुत कम हो जाने पर दिल और फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि जो लोग खुले आसमान के नीचे या अपर्याप्त गर्म कपड़ों में रात बिता रहे हैं, उन पर जान का खतरा सबसे ज्यादा है।
बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही सर्दी: अस्पतालों में बढ़े मरीज, नवजातों की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण बढ़ा जोखिम
इस भीषण ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों और नवजातों पर पड़ रहा है। अकेले रायपुर के मेकाहारा और अन्य निजी अस्पतालों में बीते एक महीने में बच्चों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा केस सामने आए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शिशुओं का शरीर वयस्कों के मुकाबले बहुत जल्दी ठंडा होता है। नवजातों की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, जिससे वे कड़ाके की सर्दी का मुकाबला नहीं कर पाते। खासकर सिजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चों को हमेशा कई परतों वाले गर्म कपड़े पहनाकर रखें।
5 जिलों में स्कूल बंद: 10 जनवरी तक प्राइमरी क्लास की छुट्टी, सुबह की पाली वाले स्कूलों के समय में भी बदलाव
बढ़ती ठंड और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शासन ने कई जिलों में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी हैं। सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। वहीं, जिन स्कूलों में दो पालियों में पढ़ाई होती है, उन्हें सुबह 9:30 बजे से खोलने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों को सुबह की कड़कड़ाती ठंड से बचाया जा सके। कलेक्टरों ने निजी स्कूलों को भी इन नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
स्वास्थ्य विभाग की सख्त एडवाइजरी: बुजुर्ग और गंभीर मरीज रहें सावधान, केवल जरूरी होने पर ही करें बाहर की यात्रा
स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने को कहा है। अचानक तापमान गिरने से सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। विभाग ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से किसी गंभीर बीमारी (जैसे अस्थमा या हृदय रोग) से जूझ रहे लोगों को विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि शीतलहर के दौरान बहुत जरूरी होने पर ही यात्रा करें। बाहर निकलते समय कान, सिर और पैरों को अच्छी तरह ढककर रखें और पर्याप्त गर्म पानी का सेवन करें।



