बारिश से धान को नुकसान, बिना बीमा वाले किसानों की बढ़ी चिंता, जानिए सरकार के मुआवजा नियमों और फसल बीमा में बड़ा अंतर

Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana CG: राज्य में चक्रवाती हवाओं और बेमौसम बारिश के कारण धान की पकी हुई फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच उन किसानों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा नहीं कराया था। प्रशासन द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र यानी आरबीसी छह चार के तहत फसलों के नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश तो दे दिए गए हैं, लेकिन इस प्रावधान के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि फसल बीमा की तुलना में बेहद कम है।

बीमा न कराने वाले किसानों को सता रहा है पछतावा

Crop Insurance Compensation Chhattisgarh: खरीफ सीजन के दौरान कृषि विभाग और प्रशासन द्वारा लगातार किसानों से फसल बीमा कराने का आग्रह किया जाता है, लेकिन जानकारी के अभाव या अन्य कारणों से बड़ी संख्या में किसानों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। उदाहरण के तौर पर एक जिले में जहां सवा लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया था, वहीं केवल सैंतालीस हजार किसानों ने ही बीमा कराया। अब मौसम खराब होने और फसल खराब होने की स्थिति सामने आने पर बिना बीमा वाले किसानों को बड़ा आर्थिक झटका लग रहा है।

आरबीसी छह चार के तहत मिलने वाली सीमित सहायता

RBC 6/4 Crop Damage Rules CG: सरकार के मौजूदा नियमों के अनुसार आरबीसी छह चार के प्रावधानों के तहत फसल क्षति का आकलन किया जाता है, जिसमें सहायता राशि की सीमा काफी सीमित होती है। नियमों के अनुसार यदि फसल को बत्तीस प्रतिशत तक नुकसान पहुंचता है, तो किसी भी प्रकार की राहत राशि नहीं दी जाती है। नुकसान तैंतीस प्रतिशत या उससे अधिक होने पर ही आंशिक सहायता तय की जाती है, जो कि बीमा योजनाओं के मुकाबले बहुत कम बैठती है।

असिंचित और सिंचित क्षेत्र के मुआवजे का बड़ा अंतर

PMFBY Vs RBC 6/4 Compensation: फसल बीमा और सरकारी मुआवजे की राशि में जमीन-आसमान का फर्क साफ दिखाई देता है। आरबीसी छह चार के प्रावधानों के तहत शत-प्रतिशत फसल बर्बाद होने पर भी असिंचित क्षेत्र के किसानों को अधिकतम आठ हजार पांच सौ रुपये और सिंचित क्षेत्र के किसानों को सत्रह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता मिलती है। इसके विपरीत फसल बीमा कराने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर पैंतालीस हजार पांच सौ से लेकर छियासठ हजार रुपये तक की क्षतिपूर्ति मिलने का प्रावधान है।

फसल बीमा का प्रीमियम और मिलने वाला बड़ा लाभ

Chhattisgarh Farmer Loss Update: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बहुत कम प्रीमियम राशि चुकानी पड़ती है। असिंचित क्षेत्र के लिए केवल नौ सौ अड़तालीस रुपये और सिंचित क्षेत्र के लिए एक हजार तीन सौ बीस रुपये प्रति हेक्टेयर का मामूली प्रीमियम जमा करना होता है। इसके बदले में किसानों को आपदा की स्थिति में कई गुना अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलती है। कम प्रीमियम के फायदों को नजरअंदाज करने वाले किसान अब सीमित मुआवजे के नियमों के कारण संकट में हैं।

दो हेक्टेयर की सीमा और मुआवजे की अन्य शर्तें

सरकारी मुआवजे के नियमों में रकबे की भी एक निश्चित सीमा तय की गई है। आरबीसी छह चार के प्रावधान के अंतर्गत एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर रकबे तक की फसल क्षति के लिए ही सहायता राशि प्रदान की जाती है, भले ही उसकी कुल कृषि भूमि इससे अधिक हो। इसके विपरीत फसल बीमा में किसान जितने क्षेत्रफल का बीमा करवाता है, उसे उसी अनुपात में पूरा लाभ मिलता है। इन सभी वजहों से बिना बीमा वाले किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।

Also Read: PM Kisan 24th Installment: पीएम किसान की 24वीं किस्त हुई जारी, किसानों के खाते में पहुंचे 2000 रुपये? ऐसे चेक करें स्टेटस

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button