
रायगढ़: रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में जिंदल पावर लिमिटेड के प्रस्तावित कोयला खदान (गेरा पालमा सेक्टर-1) की आगामी जनसुनवाई के विरोध में हजारों की संख्या में ग्रामीण लगातार आंदोलन कर रहे हैं। आज होने वाली इस जनसुनवाई को रोकने के लिए तमनार अंचल के हजारों ग्रामीण पिछले दो दिनों से कड़ाके की ठंड के बीच धौराभाठा मैदान में खुले आसमान के नीचे रात भर जागकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे इस बार अपने क्षेत्र में जनसुनवाई का टेंट भी नहीं लगने देंगे और न ही कंपनी या प्रशासन के लोगों को आने देंगे।
जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए संघर्ष
ग्रामीणों का कहना है कि उनका यह संघर्ष “जल, जंगल और जमीन” को बचाने के लिए है। उनका आरोप है कि इस क्षेत्र में कई खदानें पहले ही खुल चुकी हैं, जिसके कारण उनके क्षेत्र को विस्थापन, रोजगार और पर्यावरणीय स्थिति के मामले में पहले ही काफी नुकसान हो चुका है। ग्रामीणों का डर है कि अगर जिंदल को यह खदान मिल जाती है, तो आसपास के 15 से 20 गाँव बुरी तरह से प्रभावित हो जाएँगे। ग्रामीणों को अपनी पैतृक जमीन और गाँव छोड़ने का भय है, और उन्हें अभी तक उचित रोजगार या विस्थापन मुआवजे की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
पहले भी विरोध के चलते सुनवाई हुई थी निरस्त
ग्रामीणों ने बताया कि खदान बंद करने की मांग को लेकर वे पहले भी कलेक्ट्रेट में बड़ा प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंप चुके हैं। उनके कड़े विरोध को देखते हुए, पहले इस जनसुनवाई को अस्थाई तौर पर निरस्त कर दिया गया था। लेकिन अब प्रशासन और जिंदल प्रबंधन आज जनसुनवाई को सफल बनाने के लिए फिर से सक्रिय हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस द्वारा दमनकारी नीति अपनाई जा रही है ताकि उनके विरोध प्रदर्शन को तोड़ा जा सके।
अधिकारियों पर डराने-धमकाने का आरोप
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर उन्हें डराने-धमकाने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ प्रदेश सरकार जनसुनवाई का आयोजन करके बात सुनने का ढोंग कर रही है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी पत्र लिखकर या फोन पर लगातार ग्रामीणों को डरा-धमका रहे हैं। धौराभाठा में मौजूद मीडियाकर्मियों को ग्रामीणों ने तहसीलदार रायगढ़ का एक लिखित आदेश पत्र भी दिखाया, जिसे वे अपने आंदोलन को तोड़ने का प्रयास मान रहे हैं।
राजनीतिक नेताओं पर मैदान छोड़ने का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के कुछ नेता जो पहले उनके आंदोलन का नेतृत्व (Lead) कर रहे थे, वे अब मैदान छोड़कर भाग चुके हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार जिंदल की जनसुनवाई को सफल बनाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, ग्रामीणों ने संकल्प लिया है कि वे किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।
संघर्ष का रास्ता तय, सुनवाई निरस्त होने तक डटे रहेंगे
आंदोलनकारी ग्रामीणों ने दृढ़ता से कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र की जल, जंगल, जमीन और बच्चों के साथ आने वाली ग्रामीण पीढ़ियों को बचाने के लिए संघर्ष का रास्ता चुन लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे धौराभाठा से जनसुनवाई निरस्त करवाकर ही अपने गाँव-घर वापस जाएँगे। यह प्रदर्शन स्थानीय लोगों के अस्तित्व और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उनके मजबूत इरादे को दर्शाता है।



