
CG Assembly Special Session: छत्तीसगढ़ की राजनीति में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में इस बिल के पारित न हो पाने के विरोध में भाजपा ने सोमवार को रायपुर में विशाल जनआक्रोश रैली निकाली। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य सरकार इसी महीने विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाएगी। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष के अड़ियल रवैये के खिलाफ सदन में निंदा प्रस्ताव पारित करना है। सीएम साय ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के हक की लड़ाई अब सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी।
इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक उमड़ा ‘जनआक्रोश’
भाजपा महिला मोर्चा के नेतृत्व में निकाली गई यह पदयात्रा बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम पहुंची। रैली में मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, डिप्टी सीएम अरुण साव और कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए। भाजपा का आरोप है कि इंडी गठबंधन ने सोची-समझी साजिश के तहत संसद में महिलाओं के अधिकार को बाधित किया है। राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह सड़कों पर उतरा महिलाओं का वास्तविक गुस्सा है और विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है।
जानिए क्या है विशेष सत्र बुलाने की संवैधानिक प्रक्रिया
विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना होता है। सबसे पहले मुख्यमंत्री अपनी कैबिनेट के मंत्रियों के साथ बैठक कर सत्र की आवश्यकता पर चर्चा करते हैं और औपचारिक निर्णय लेते हैं। कैबिनेट के इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाता है। राज्यपाल से हरी झंडी मिलने के बाद ही विधानसभा सचिवालय सत्र की अधिसूचना जारी करता है। साय सरकार अब तेजी से इस प्रक्रिया को पूरा करने में जुट गई है ताकि इसी महीने सदन में निंदा प्रस्ताव लाकर विपक्ष की घेराबंदी की जा सके।
27 अप्रैल तक चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन
भाजपा ने इस मुद्दे को केवल एक दिन की रैली तक सीमित न रखकर इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन में बदलने की रणनीति बनाई है। तय कार्यक्रम के अनुसार 20 अप्रैल को प्रदेश स्तरीय जन आक्रोश महिला पदयात्रा संपन्न हुई। इसके बाद 23 और 24 अप्रैल को राज्य के सभी जिलों में विशाल महिला सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। आंदोलन के अंतिम चरण में 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर विपक्षी नेताओं के पुतले फूंके जाएंगे। भाजपा का लक्ष्य इस अभियान के जरिए ग्रामीण अंचलों तक महिलाओं को यह बताना है कि उनके आरक्षण की राह में किसने रोड़े अटकाए हैं।
राजनीतिक गलियारों में मची हलचल, विधानसभा सत्र पर टिकी नजर
विशेष सत्र बुलाने के फैसले ने छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सदन में निंदा प्रस्ताव लाकर सरकार विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में लाना चाहती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार मातृशक्ति को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक कदम उठा रही थी, तब कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने अड़ंगा लगाकर अपनी मानसिकता उजागर कर दी। अब देखना होगा कि विधानसभा के इस विशेष सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कैसी तीखी बहस देखने को मिलती है।



