
CG Tendupatta News: छत्तीसगढ़ के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए राज्य सरकार की तरफ से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने वादे के मुताबिक तेंदूपत्ता संग्रहण की मजदूरी दरों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। सरकार के इस फैसले से ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में रहने वाले उन परिवारों की आय में सीधा इजाफा होगा जो पूरी तरह से वनोपज संग्रहण के काम पर निर्भर हैं। नई व्यवस्था के तहत बढ़ी हुई राशि को पारदर्शी तरीके से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
मजदूरी दर 4000 से बढ़कर हुई 5500 रुपये, सीधे खाते में आ रही रकम
राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए संग्रहण पारिश्रमिक यानी मजदूरी की दर को 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दिया है। इस फैसले के बाद संग्राहकों को प्रति बोरा पूरे 1,500 रुपये का अतिरिक्त फायदा मिल रहा है। बिचौलियों और गड़बड़ियों की आशंका को खत्म करने के लिए सरकार इस पूरी राशि का भुगतान सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से ऑनलाइन कर रही है। इससे ग्रामीणों को अपनी मेहनत का पैसा पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
केशकाल वनमंडल के 2800 से ज्यादा संग्राहकों को मिला बोनस का लाभ
इसी कड़ी में बस्तर संभाग के केशकाल वनमंडल के अंतर्गत आने वाले पात्र परिवारों के लिए भुगतान की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक क्षेत्र के 2,803 पात्र तेंदूपत्ता संग्राहकों को साल 2023 के दौरान किए गए संग्रहण के एवज में प्रोत्साहन राशि बांटी जा रही है। इन परिवारों के बैंक खातों में कुल 40 लाख 39 हजार 891 रुपये की बोनस और पारिश्रमिक राशि ऑनलाइन ट्रांसफर की जा रही है। इस आर्थिक मदद के मिलने से वनांचल के इन परिवारों के चेहरों पर खुशी देखी जा रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि उनकी सरकार प्रदेश के गरीब, किसान और वनवासियों के आर्थिक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता की दरों में की गई यह वृद्धि केवल एक मजदूरी नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा जिससे स्थानीय बाजार मजबूत होंगे। वनोपज संग्रहण के काम से जुड़े परिवारों को समय पर सही दाम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले दिनों में अन्य वनमंडलों में भी भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।



