
Aktee Festival Wedding Muhurat 2026: छत्तीसगढ़ में ‘अक्ती’ यानी अक्षय तृतीया को लेकर उत्साह का माहौल है। लोक परंपराओं के अनुसार यह दिन मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश भर में परशुराम जयंती और अक्ती की तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि इस साल कुछ पंचांगों में अक्ती की तिथि पर विवाह का स्पष्ट मुहूर्त नहीं दिख रहा है, लेकिन ज्योतिषियों का कहना है कि यह एक ‘अबूझ मुहूर्त’ है। इसका अर्थ यह है कि इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी शादी-विवाह और अन्य शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। अक्ती के अगले दिन से ही गांवों और शहरों में वैवाहिक कार्यक्रमों की धूम शुरू हो जाएगी।
परशुराम जयंती पर बन रहा है विशेष ज्योतिषीय संयोग
वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार इस बार 19 अप्रैल को शुक्र ग्रह वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र का अपनी ही राशि में आना एक बेहद शुभ संकेत माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे भौतिक सुख-सुविधाओं और आर्थिक मजबूती का कारक माना गया है। इस दौरान कला और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। परशुराम जयंती के अवसर पर ब्राह्मण समाज द्वारा महाआरती, भजन संध्या और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है।
पंचांग में मुहूर्त का संकट पर लोक मान्यताओं का भरोसा
अमूमन लोग शादी तय करने से पहले पंचांग में शुभ तिथियों का मिलान करते हैं। महामाया मंदिर के विद्वानों के मुताबिक देव पंचांग में इस बार अक्ती पर विवाह का औपचारिक मुहूर्त दर्ज नहीं है। इसके बावजूद अक्ती की गरिमा इतनी अधिक है कि इसे किसी अन्य मुहूर्त की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है, इसलिए लोग बेझिझक इस दिन गृह प्रवेश, स्वर्ण खरीदी और विवाह जैसे संस्कार संपन्न करते हैं। अक्ती के बाद अप्रैल की 20, 21, 26, 29 और 30 तारीख को भी विवाह के योग बने हुए हैं।
अधिकमास और गुरु अस्त के कारण लगेगा ब्रेक
मई महीने की शुरुआत में 5 से 10 तारीख तक विवाह के कई मुहूर्त हैं, लेकिन इसके बाद मांगलिक कार्यों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाएगा। 17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहेगा। हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान विवाह वर्जित माने जाते हैं, हालांकि इस अवधि में पूजा-पाठ और दान-पुण्य करना श्रेष्ठ फलदायी होता है। इसके बाद जून में 19 तारीख से दोबारा शहनाइयां गूंजेंगी। जुलाई के शुरुआती पखवाड़े में कुछ मुहूर्त हैं, पर 16 जुलाई से गुरु तारा अस्त होने के कारण शुभ कार्यों पर फिर रोक लग जाएगी।
देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चार महीने का चातुर्मास
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है, जिसके साथ ही चौमासा यानी चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इन चार महीनों के दौरान साधु-संत एक ही स्थान पर रुककर जप-तप और प्रवचन करते हैं और मांगलिक कार्यों के लिए द्वार बंद हो जाते हैं। चातुर्मास के दौरान विवाह नहीं होते। इसके बाद सीधे 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन भगवान के जागने और तुलसी विवाह के साथ ही शुभ मुहूर्त का सिलसिला दोबारा शुरू होगा।
साल के अंत में विवाह के लिए उपलब्ध शुभ तिथियां
जिन परिवारों में साल के अंत में विवाह की योजना है, उनके लिए नवंबर और दिसंबर में कई विकल्प मौजूद हैं। नवंबर में 21, 24, 25 और 26 तारीख को श्रेष्ठ मुहूर्त हैं। वहीं दिसंबर महीने की शुरुआत में 2 से 5 तारीख और फिर 11 व 12 दिसंबर को मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम तिथियां मिल रही हैं। रायपुर के आशीर्वाद भवन और अन्य सामुदायिक केंद्रों में इन तिथियों के लिए बुकिंग अभी से फुल होने लगी है। कुल मिलाकर अक्ती से शुरू हुआ यह वैवाहिक सीजन उतार-चढ़ाव के साथ साल के अंत तक जारी रहेगा।
| महीना | विवाह के शुभ मुहूर्त |
| अप्रैल | 20, 21, 26, 29, 30 |
| मई | 5, 6, 7, 8, 10 |
| जून | 19, 22, 23, 24, 26, 27, 28, 29 |
| जुलाई | 1, 3, 4, 6, 7, 8, 9 |
| नवंबर | 21, 24, 25, 26 |
| दिसंबर | 2, 3, 4, 5, 11, 12 |
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