
Ravi Bhagat BJP Resignation: छत्तीसगढ़ की राजनीति से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है. भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ युवा नेता रवि भगत ने भारतीय जनता पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने न केवल अपने संगठनात्मक पदों को छोड़ा है बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी पूरी तरह नाता तोड़ लिया है. रवि भगत ने अपना यह त्याग पत्र स्थानीय मंडल अध्यक्ष को भेजने के साथ ही सोशल मीडिया पर भी सार्वजनिक कर दिया है जिसके बाद से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अचानक सरगर्मी बढ़ गई है.
मंडल अध्यक्ष को भेजा पत्र
मूल रूप से रायगढ़ जिले के लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले रवि भगत ने अपना इस्तीफा लैलूंगा के भाजपा मंडल अध्यक्ष रमेश होता को औपचारिक पत्र के जरिए सौंपा है. इस पत्र में उन्होंने संगठन छोड़ने के पीछे किसी बड़ी राजनीतिक वजह का खुलासा नहीं किया है. रवि भगत ने बेहद संक्षिप्त शब्दों में लिखते हुए केवल निजी कारणों का हवाला दिया है और कहा है कि वे अपनी व्यक्तिगत व्यस्तताओं के चलते अब पार्टी के कामों को आगे बढ़ा पाने में असमर्थ हैं.

पहले मिला था नोटिस
भले ही रवि भगत ने इस्तीफे का कारण व्यक्तिगत बताया हो लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे पिछले कुछ महीनों से चल रहे घटनाक्रमों से जोड़कर देख रहे हैं. रवि भगत पिछले काफी समय से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर अपनी ही पार्टी के कुछ निर्णयों को लेकर असंतोष जाहिर कर रहे थे. इसी के चलते पिछले साल 26 जुलाई 2025 को भाजपा प्रदेश संगठन की ओर से उन्हें एक कड़ा ‘कारण बताओ नोटिस’ भी थमाया गया था.

अनुशासनहीनता का था आरोप
पार्टी के प्रदेश महामंत्री और मुख्यालय प्रभारी जगदीश (रामू) रोहरा के हस्ताक्षरित उस नोटिस में रवि भगत पर गंभीर आरोप लगे थे. नोटिस में स्पष्ट कहा गया था कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार पार्टी की नीतियों, रीति-रिवाजों और संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. संगठन ने उनसे तीन दिनों के भीतर इस पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा था और चेतावनी दी थी कि जवाब संतोषजनक न होने पर उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जा सकता है.
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
रवि भगत छत्तीसगढ़ भाजपा के एक बेहद सक्रिय और मुखर युवा चेहरे माने जाते रहे हैं. वे न केवल राज्य स्तर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर पर भाजयुमो के राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. आदिवासी बाहुल्य रायगढ़ और लैलूंगा क्षेत्र के युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. ऐसे में विधानसभा चुनावों के कुछ समय बाद उनका इस तरह अचानक पार्टी छोड़ना क्षेत्र में भाजपा संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.



