
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) और EOW (आर्थिक अपराध शाखा) की टीमों ने रविवार तड़के बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोंडागांव और अंबिकापुर सहित करीब 20 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। यह छापेमारी मुख्य रूप से आबकारी और जिला खनिज न्यास निधि (DMF) घोटाले से जुड़े मामलों की जांच को आगे बढ़ाने के लिए की जा रही है। अधिकारियों द्वारा संबंधित व्यक्तियों के निवास और व्यावसायिक ठिकानों पर आवश्यक दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
दुर्ग में पूर्व आबकारी आयुक्त और रायपुर में कारोबारी निशाने पर
छापेमारी के दौरान, दुर्ग जिले के भिलाई स्थित पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के ठिकानों पर दबिश दी गई। साथ ही, रायपुर की लॉ-विस्टा कॉलोनी में कारोबारी और सप्लायर हरपाल अरोरा के निवास पर भी कार्रवाई जारी है। यह रेड आबकारी विभाग से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की गहन जांच का हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारी इन जगहों से वित्तीय लेन-देन, संपत्ति और विभागीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज जब्त कर रहे हैं।
धमतरी, कोंडागांव और सरगुजा में भी जांच की आंच
ACB-EOW की टीम ने अन्य प्रमुख जिलों में भी कार्रवाई की है। धमतरी में पूर्व विधायक जया बेन दोषी के पोते, रियल एस्टेट कारोबारी केतन दोषी के घर जांच चल रही है। कोंडागांव में कारोबारी कोणार्क जैन के घर पर भी दबिश दी गई, जो वर्ष 2019-20 में DMF सप्लाई कार्यों से जुड़े थे। इसके अलावा, सरगुजा में पशु चिकित्सक डॉ. तनवीर अहमद और अंबिकापुर के सप्लायर अमित अग्रवाल के ठिकानों पर भी वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

अक्टूबर में भी हुई थी DMF घोटाले से जुड़ी रेड
यह पहली बार नहीं है जब DMF घोटाले से जुड़े ठिकानों पर जांच हुई है। इससे पहले, 29 अक्टूबर को भी ACB और EOW की संयुक्त टीमों ने DMF घोटाले से जुड़े सप्लायरों के 14 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें रायपुर में अशोक और अमित कोठारी, राजनांदगांव में राधा कृष्ण एजेंसी अग्रवाल के निवास, नहटा और भंसाली के ठिकाने, तथा दुर्ग में कारोबारी नीलेश पारख के यहां जांच की गई थी।

आखिर क्या है जिला खनिज न्यास निधि (DMF) घोटाला?
DMF घोटाला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट पर आधारित है। ED के तथ्यों के आधार पर EOW ने धारा 120बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है। केस के मुताबिक, कोरबा के डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुँचाया गया और अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ।

टेंडर कमीशन का बड़ा खेल: 40% तक रिश्वत
ED की जांच से यह खुलासा हुआ कि ठेकेदारों ने अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को भारी मात्रा में कमीशन का भुगतान किया, जो कि कांट्रैक्ट की राशि का 25% से 40% तक था। ED के दावे के अनुसार, 2021-22 और 2022-23 में कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित IAS रानू साहू और अन्य अधिकारियों से मिलीभगत कर टेंडर की राशि का 42% तक कमीशन दिया। रिश्वत के लिए दी गई रकम को विक्रेताओं ने अपने रिकॉर्ड में ‘आवासीय के रूप में दर्ज किया था।

करोड़ों की संपत्ति कुर्क और कैश बरामदगी
तलाशी अभियान के दौरान कई फर्जी स्वामित्व इकाइयां, आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, 76.50 लाख रुपए कैश बरामद किए गए, और 35 लाख रुपए वाले 8 बैंक खाते सीज किए गए। घोटाले की गंभीरता को देखते हुए ED पहले ही इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही है। ED ने पूर्व में आरोपी निलंबित IAS रानू साहू, माया वारियर, मनोज कुमार द्विवेदी समेत 10 लोगों की 23.79 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति कुर्क की है।
DMF का उद्देश्य: खनन प्रभावितों के लाभ का दुरुपयोग
जिला खनिज न्यास निधि (DMF) का मूल उद्देश्य छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में खनन से संबंधित परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के लाभ के लिए काम करना है। यह एक वित्त पोषित ट्रस्ट है। आरोप है कि इसी फंड का दुरुपयोग कर टेंडर में धांधली की गई। ED के मुताबिक, ठेकेदारों के बैंक खाते में जमा की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे कैश में निकाल लिया गया, जिससे यह फंड अपने वास्तविक उद्देश्य से भटक गया।



