Raigarh Sub Treasury Officer Bribery Case: अफसर को गूगल-पे पर भेजी रिश्वत की रकम: मेडिकल बिल पास कराने के लिए मांगा था कमीशन, अब सबूतों के साथ कलेक्टर से शिकायत

Raigarh News: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। घरघोड़ा उपकोषालय (Sub-Treasury) में पदस्थ एक अधिकारी पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपनी ही एक महिला सहकर्मी का मेडिकल बिल पास करने के बदले रिश्वत ली। डिजिटल इंडिया के दौर में घूसखोरी का तरीका भी हाईटेक हो गया है। आरोप के मुताबिक, अधिकारी ने नकदी के बजाय ऑनलाइन माध्यम से पैसे मंगवाए। अब पीड़ित पक्ष ने बैंक ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्डिंग के साथ जनदर्शन में कलेक्टर से शिकायत की है, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

सिजेरियन डिलीवरी के मेडिकल बिल पर मांगा 20% कमीशन

पूरा मामला घरघोड़ा उपकोषालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 सिम्मी पटनायक के मेडिकल क्लेम से जुड़ा है। शिकायतकर्ता राजेश कुमार पटनायक ने बताया कि उनकी पत्नी की सिजेरियन डिलीवरी के बाद 44,425 रुपये का मेडिकल बिल भुगतान के लिए कार्यालय में प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि इस बिल को पास करने के एवज में उपकोषालय अधिकारी मुकेश नायक ने कुल राशि का 20 प्रतिशत कमीशन मांगा। सरकारी सिस्टम के भीतर अपनी ही कर्मचारी से इस तरह की मांग ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

10 हजार से शुरू हुआ सौदा 5 हजार में हुआ ‘डिजिटल’ तय

शिकायत के अनुसार, रिश्वत की रकम को लेकर काफी देर तक मोलभाव चलता रहा। पहले अधिकारी ने 10,000 रुपये की मांग की थी, जिसे बाद में कम करके 8,000 रुपये किया गया। काफी दबाव बनाने के बाद अंत में 5,000 रुपये देना तय हुआ। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह लेन-देन पूरी तरह डिजिटल रहा। आरोप है कि अधिकारी ने व्हाट्सएप के जरिए अपना नंबर भेजा और फोनपे (PhonePe) के माध्यम से रिश्वत की राशि ट्रांसफर करवाई। अब यही डिजिटल ट्रांजैक्शन अधिकारी के लिए गले की हड्डी बन गया है।

जनदर्शन में सबूतों की झड़ी, कॉल रिकॉर्डिंग और चैट भी शामिल

पीड़ित पक्ष अब चुप बैठने के मूड में नहीं है। राजेश पटनायक ने कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने साक्ष्य के रूप में बैंक स्टेटमेंट, व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट और पैसों की डिमांड वाली कॉल रिकॉर्डिंग अधिकारियों को सौंपी है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास ऐसे पुख्ता सबूत हैं जिनसे यह साबित होता है कि अधिकारी ने जानबूझकर बिल को अटकाया और पैसे मिलने के बाद ही उसे आगे बढ़ाया। रायगढ़ जिला प्रशासन ने इन सबूतों को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

भ्रष्टाचार की प्रथा: क्या हर बिल पर तय है कमीशन का रेट?

इस मामले के उजागर होने के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या घरघोड़ा के विभिन्न सरकारी विभागों में बिल पास कराने के लिए कमीशन लेना एक सामान्य रिवाज बन चुका है। सूत्रों का कहना है कि यह केवल एक मामला है, जबकि कई छोटे कर्मचारी और वेंडर डर के मारे शिकायत नहीं कर पाते। लोगों का आरोप है कि फाइलों को टेबल दर टेबल सरकाने के लिए बाबू और अधिकारी खुलेआम सौदेबाजी करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार अब निचले स्तर के दफ्तरों में जड़ें जमा चुका है।

विभागीय जांच के घेरे में अफसर, जल्द हो सकती है बड़ी कार्रवाई

शिकायत और साक्ष्यों की मजबूती को देखते हुए माना जा रहा है कि आरोपी अधिकारी मुकेश नायक पर गाज गिरना तय है। कलेक्टर ने संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अगर जांच में डिजिटल लेन-देन और कॉल रिकॉर्डिंग की पुष्टि हो जाती है, तो अधिकारी को सस्पेंड करने के साथ-साथ उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। फिलहाल, रायगढ़ का यह ‘ऑनलाइन रिश्वत कांड’ पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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