
पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने दुनिया भर में ईंधन की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया और कुछ अन्य माध्यमों पर यह अफवाह तेजी से फैल रही है कि भारत के पास केवल 6 दिनों का तेल बचा है और जल्द ही पेट्रोल-डीजल व एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत शुरू हो जाएगी। इन खबरों के बीच होटल, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों में पैनिक देखा जा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए जनता को भरोसा दिलाया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
अफवाहों पर लगाम: पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा—पूरी तरह सुरक्षित है देश
देश में तेल के संकट की खबरों पर विराम लगाते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार, भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सभी पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी भ्रामक जानकारी पर यकीन न करें, जो समाज में बेवजह डर पैदा करने के लिए फैलाई जा रही है। देश के किसी भी हिस्से में ईंधन की कमी की कोई वास्तविक रिपोर्ट नहीं है।
60 दिनों का एडवांस बैकअप: तेल कंपनियों ने पहले ही कर ली है तैयारी
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद भारत की तेल आपूर्ति पर कोई बड़ा संकट नहीं है। मंत्रालय ने जानकारी दी है कि भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों यानी दो महीनों के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई पहले ही सुनिश्चित कर ली है। भारत आज दुनिया भर के 41 से ज्यादा देशों से तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या देश पर निर्भरता कम हुई है। युद्ध की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक रास्तों और सप्लायर्स से लगातार बातचीत जारी है ताकि स्टॉक में कोई कमी न आए।
रणनीतिक भंडार का सुरक्षा कवच: महीनों तक के लिए निश्चिंत है भारत
भारत सरकार ने केवल तात्कालिक जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगले दो महीनों की अतिरिक्त खरीद भी सुरक्षित कर ली गई है। इसके अलावा, देश के ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (भूमिगत गुफाओं में जमा आपातकालीन तेल भंडार) में भी पर्याप्त मात्रा मौजूद है। इन रिजर्व का उपयोग केवल तब किया जाता है जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाए। फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है, इसलिए “रिजर्व खत्म होने” की बातें पूरी तरह निराधार और गलत हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का सच: तनाव के बीच भी जारी है सप्लाई
भले ही पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण समुद्री व्यापारिक मार्ग संवेदनशील हो गए हैं, लेकिन भारत को मिलने वाले क्रूड ऑयल की मात्रा में कोई गिरावट नहीं आई है। तकनीकी और कूटनीतिक स्तर पर भारत लगातार तेल उत्पादक देशों के संपर्क में है। मंत्रालय का कहना है कि भारत को मिलने वाला तेल सुरक्षित रास्तों से देश पहुंच रहा है। अफवाह फैलाने वालों पर निशाना साधते हुए सरकार ने कहा कि इस तरह की झूठी खबरों को सिरे से खारिज कर देना चाहिए, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर और तैयार है।
पैनिक बाइंग से बचें: पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की जरूरत नहीं
गैस और पेट्रोल खत्म होने की अफवाह के कारण कई शहरों में लोग पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ‘पैनिक बाइंग’ से स्थानीय स्तर पर अस्थायी समस्या पैदा हो सकती है, जबकि वास्तव में स्टॉक की कोई कमी नहीं है। होटल और रेस्तरां संचालकों को भी आश्वस्त किया गया है कि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई सुचारू रूप से जारी रहेगी। सरकार स्थिति की हर घंटे निगरानी कर रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है।
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