Bilaspur News: “साहब मैं जिंदा हूं”: आधार कार्ड में ‘मृत’ घोषित महिला पहुंची कलेक्टर के पास, सिस्टम की गलती से रुकी पेंशन और राशन

बिलासपुर जिले के कलेक्टर जनदर्शन में उस समय अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब एक बुजुर्ग महिला हाथ जोड़कर अधिकारियों के सामने खुद के जिंदा होने की गुहार लगाने लगी। मस्तूरी क्षेत्र की रहने वाली गया बाई कुर्रे के लिए उनका अपना आधार कार्ड ही जी का जंजाल बन गया है। सरकारी रिकॉर्ड और आधार डेटा में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। अपनी इसी ‘मौत’ को झुठलाने और खुद को जीवित साबित करने के लिए यह बुजुर्ग महिला कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रही है। जैसे ही उन्होंने छत्तीसगढ़ी में कहा, “देख लेवा मैं जियत हावव” (देख लीजिए मैं जिंदा हूं), वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया।

सरकारी योजनाओं पर लगा ब्रेक, दाने-दाने को मोहताज बुजुर्ग

पचपेड़ी निवासी गया बाई के मुताबिक, आधार कार्ड में ‘मृत’ दर्ज होने की वजह से उनकी जिंदगी पटरी से उतर गई है। सबसे बड़ी मार उनके राशन पर पड़ी है, क्योंकि राशन दुकान संचालक ने उन्हें अनाज देने से साफ मना कर दिया है। इसके अलावा, राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है। वृद्धावस्था पेंशन से लेकर अन्य तमाम शासकीय लाभ सिर्फ एक तकनीकी गलती की वजह से बंद हो गए हैं। गया बाई का कहना है कि पिछले कई महीनों से वह दफ्तरों की खाक छान रही हैं, लेकिन सिस्टम की फाइलों में वह अब भी ‘मरे’ हुए लोगों की सूची में दर्ज हैं।

दस्तावेजों का पुलिंदा लेकर जनदर्शन पहुंचीं गया बाई

कलेक्टर के सामने अपनी सच्चाई पेश करने के लिए गया बाई ने कोई कसर नहीं छोड़ी। वे अपने साथ दस्तावेजों का पूरा ढेर लेकर आई थीं, जिसमें आधार कार्ड की फोटोकॉपी, राशन कार्ड, वोटर आईडी और बैंक पासबुक शामिल थे। इतना ही नहीं, उन्होंने एक जीवित होने का शपथ पत्र (Affidavit) और जीवित प्रमाण पत्र भी साथ रखा था ताकि अधिकारियों को उनकी मौजूदगी पर कोई शक न रहे। गया बाई ने आवेदन सौंपते हुए मांग की है कि उनके आधार नंबर [Aadhaar Redacted] को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए और रिकॉर्ड में उन्हें दोबारा जीवित घोषित किया जाए।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती, कब सुधरेगी गलती?

अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है। गया बाई ने जिले के मुखिया के सामने अपनी फरियाद रख दी है और अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी रुकी हुई पेंशन और राशन फिर से शुरू हो सकेंगे। यह मामला सीधे तौर पर आधार डेटाबेस और स्थानीय सत्यापन प्रक्रिया की बड़ी चूक को दर्शाता है। फिलहाल, अधिकारियों ने मामले की जांच कर जल्द सुधार करने का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि कागजों पर ‘मर’ चुकी गया बाई को सरकारी फाइलों में फिर से कब तक ‘जिंदगी’ मिलती है, ताकि वह अपना शेष जीवन बिना किसी आर्थिक संकट के गुजार सकें।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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