
PM Janman Yojana Road Corruption Mainpat: सरगुजा जिले के मैनपाट में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यहां के कदनाई इलाके में ‘पीएम जनमन योजना’ के तहत बनाई गई एक सड़क निर्माण के कुछ ही घंटों बाद बिखरने लगी। आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई राशि का किस तरह दुरुपयोग हो रहा है, इसकी बानगी इस सड़क को देखकर साफ नजर आती है। स्थानीय ग्रामीणों ने जब सड़क की हालत देखी तो वे दंग रह गए और उन्होंने इस घटिया निर्माण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बनने के अगले ही दिन जवाब दे गई 2.5 किमी की सड़क
Mainpat News: मैनपाट के ग्राम कदनाई से लोटाभवना को जोड़ने वाली 2.5 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क का काम कल ही पूरा हुआ था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 24 घंटे बीतने से पहले ही सड़क की गिट्टियां और डामर बाहर आने लगे हैं। सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि वाहन तो दूर, पैदल चलने पर भी निर्माण सामग्री उखड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनाने के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है और सतह पर डामर का छिड़काव बेहद लापरवाही से किया गया है।
ग्रामीणों ने दिखाई हकीकत: हाथ लगाते ही उखड़ रहा डामर
इस भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए गांव के सीमा मिंज और जगेश्वर समेत कई लोगों ने वीडियो और तस्वीरों के जरिए हकीकत बयां की है। ग्रामीणों ने दिखाया कि सड़क पर डामर की इतनी पतली परत बिछाई गई है कि उसे हाथों से ही कागज की तरह उखाड़ा जा सकता है। निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। घटिया सामग्री के इस्तेमाल से सड़क अब पूरी तरह जर्जर दिखने लगी है, जबकि यह इलाका दुर्गम है और यहां पक्की सड़क की सख्त जरूरत थी।
आदिवासियों के लिए बनी ‘पीएम जनमन योजना’ को लगा पलीता
‘पीएम जनमन योजना’ जिसे प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान भी कहा जाता है, केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) तक बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। मैनपाट जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में इस तरह का भ्रष्टाचार न केवल सरकारी खजाने को चूना लगा रहा है, बल्कि उन समुदायों के साथ भी अन्याय है जिनके हक के लिए यह पैसा आवंटित किया गया था।
ठेकेदार और इंजीनियर की सांठगांठ के आरोप
घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। गांव वालों का सीधा आरोप है कि संबंधित ठेकेदार और विभागीय इंजीनियर ने आपस में मिलीभगत कर सरकारी बजट को ठिकाने लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि इंजीनियर की मौजूदगी और निगरानी के बिना ही यह काम किया गया, जिससे ठेकेदार को मनमानी करने की छूट मिल गई। अफसरों की इस लापरवाही की वजह से लाखों रुपये की लागत से बनी यह सड़क अब दोबारा बनाने लायक स्थिति में पहुंच गई है।
उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की उठी मांग
सड़क की दुर्दशा को लेकर ग्रामीणों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों की निगरानी में यह घटिया काम हुआ है, उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक सड़क का निर्माण दोबारा मानक गुणवत्ता के साथ नहीं किया जाता, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।



