छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू का खतरा: बिलासपुर में पुष्टि के बाद धमतरी में हाई अलर्ट, पशुपालन विभाग मुस्तैद

बिलासपुर के कोनी स्थित शासकीय कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र में पक्षियों की रहस्यमयी मौत के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में हड़कंप मच गया है। जांच के लिए भेजे गए सैंपल्स की भोपाल लैब से आई रिपोर्ट में बर्ड फ्लू (H5N1) संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस खबर के सामने आते ही राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। धमतरी जिले में भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है और पोल्ट्री फार्म्स से लेकर जंगली पक्षियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। पशुधन विकास विभाग ने अपने सभी मैदानी कर्मचारियों को मुस्तैद रहने और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

कोनी प्रक्षेत्र में 5 हजार मुर्गियों की मौत: भोपाल की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

बिलासपुर के सरकारी पोल्ट्री फार्म में पिछले कुछ दिनों के भीतर करीब 5 हजार मुर्गे-मुर्गियों की अचानक मौत हो गई थी। इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों के मरने से विभाग में खलबली मच गई थी। आनन-फानन में मृत पक्षियों के नमूने जांच के लिए उच्च सुरक्षा पशुरोग निदान प्रयोगशाला, भोपाल भेजे गए थे। रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अब संक्रमण को फैलने से रोकना बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस बेहद संक्रामक है और बहुत तेजी से एक पक्षी से दूसरे पक्षी में फैलता है।

धमतरी में सतर्कता: उपसंचालक ने टीम को फील्ड पर उतारा

बिलासपुर में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद धमतरी जिले का पशुधन विकास विभाग भी एक्टिव मोड में आ गया है। विभाग के उपसंचालक अवधेश मरकाम ने बताया कि जिले के सभी विकासखंडों में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया है। कुक्कुट पालन केंद्रों और जलाशयों के आसपास मृत पक्षियों की सूचना मिलते ही तत्काल एक्शन लेने की तैयारी है। विभाग का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि संक्रमण किसी भी सूरत में जिले की सीमाओं के भीतर दाखिल न हो पाए। इसके लिए पोल्ट्री व्यवसायियों को भी बायो-सिक्योरिटी के कड़े नियम पालन करने की सलाह दी गई है।

इंसानों में संक्रमण का डर: लक्षणों पर रखें पैनी नजर

बर्ड फ्लू केवल पक्षियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले इंसानों को भी अपनी चपेट में ले सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानों में इसके संक्रमण के बाद तेज बुखार, खांसी, गले में खराश और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर मामलों में यह निमोनिया का रूप ले सकता है, जो जानलेवा साबित होता है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे मृत पक्षियों से दूर रहें और पोल्ट्री उत्पादों (अंडा और मांस) को अच्छी तरह पकाकर ही उपयोग करें।

पक्षियों की श्वसन प्रणाली पर हमला: क्यों घातक है यह वायरस?

बर्ड फ्लू का वायरस मुख्य रूप से पक्षियों की श्वसन प्रणाली और आंतों को प्रभावित करता है। यह जंगली पक्षियों के जरिए पालतू मुर्गियों तक पहुंचता है। चूंकि जंगली पक्षी लंबी दूरी तय करते हैं, इसलिए संक्रमण के एक जिले से दूसरे जिले में पहुंचने की संभावना बनी रहती है। कोनी में जिस तरह से अचानक हजारों पक्षियों की जान गई, वह इस वायरस की संहारक क्षमता को दर्शाता है। विभाग अब उन सभी रास्तों की निगरानी कर रहा है जहां से पोल्ट्री का परिवहन किया जाता है।

अवैध परिवहन पर शिकंजा: संदिग्धों पर प्रशासन की पैनी नजर

अलर्ट के बीच प्रशासन ने पोल्ट्री उत्पादों के परिवहन पर भी कड़ाई शुरू कर दी है। धमतरी में जांच के दौरान कुछ संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है जो बिना वैध दस्तावेजों के पक्षियों का परिवहन कर रहे हैं। पुलिस और विभागीय टीम सीमाओं पर सघन चेकिंग कर रही है ताकि संक्रमित क्षेत्रों से आने वाले पक्षियों को रोका जा सके। पशुपालकों से अपील की गई है कि यदि उनके फार्म में एक साथ कई पक्षियों की मौत होती है, तो उसे छिपाने के बजाय तुरंत सरकारी अस्पताल को सूचित करें।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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