
Cockroach Janta Party Online Cyber Fraud: इंटरनेट पर रातों-रात मशहूर होने वाले किसी भी नए ट्रेंड को साइबर ठग किस तरह अपनी कमाई का जरिया बना लेते हैं, इसका एक ताजा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इन दिनों इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युवाओं के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) नाम का एक डिजिटल अभियान तेजी से वायरल हो रहा है। देश से लेकर विदेशों तक फैले इस अभियान के भयंकर क्रेज का फायदा अब ऑनलाइन ठगों ने उठाना शुरू कर दिया है। साइबर अपराधियों ने इस ट्रेंड के नाम पर लोगों को ठगने के लिए फिशिंग का जाल बुना है, जिसे लेकर देश के अलग-अलग राज्यों की पुलिस ने आम नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है।
क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और कैसे इसकी आड़ में एक्टिव हुए ऑनलाइन ठग
दरअसल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सोशल मीडिया पर वायरल एक व्यंग्यात्मक अभियान है, जिसे इंटरनेट पर युवा वर्ग बेरोजगारी और मौजूदा सिस्टम के प्रति अपनी नाराजगी दिखाने के लिए एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। रातों-रात करोड़ों की संख्या में फॉलोअर्स बटोरने वाले इस नाम का इस्तेमाल अब स्कैमर्स लोगों की जेब साफ करने के लिए कर रहे हैं। ठगों की टोली व्हाट्सएप, फेसबुक मैसेंजर और सामान्य एसएमएस के जरिए लोगों को इस तथाकथित डिजिटल पार्टी से जुड़ने का न्योता भेज रही है। युवाओं को अपनी ओर खींचने के लिए मैसेज में ‘सिस्टम बदलने का समय आ गया है’ और ‘युवाओं के लिए बड़ा मौका’ जैसी बातें लिखी होती हैं, जिसके नीचे एक संदिग्ध वेब लिंक दिया होता है।
पुलिस ने वीडियो जारी कर समझाया ठगी का तरीका, एक क्लिक से हैक हो रहा मोबाइल फोन
इस नए डिजिटल फ्रॉड की गंभीरता को देखते हुए लुधियाना पुलिस और राजस्थान की भरतपुर पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों पर जागरूकता संदेश और वीडियो जारी किए हैं। लुधियाना पुलिस के अधिकारी अमरिंदर सिंह ने एक वीडियो संदेश में विस्तार से बताया है कि यह पूरा स्कैम कैसे काम करता है। पुलिस के मुताबिक व्हाट्सएप पर भेजा जा रहा यह लिंक पूरी तरह से एक फिशिंग टूल है। जैसे ही कोई उत्सुक युवा इस लिंक पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल फोन का पूरा कंट्रोल बैकग्राउंड में स्कैमर्स के पास चला जाता है। फोन हैक होते ही पीड़ित के डिवाइस में मौजूद बैंकिंग ऐप्स के पासवर्ड, ओटीपी और निजी तस्वीरें सीधे ठगों के सर्वर पर अपलोड हो जाती हैं।
बैंक खातों से उड़ रहे पैसे और पीड़ितों के नाम पर लिया जा रहा है फर्जी लोन
साइबर एक्सपर्ट्स और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस फिशिंग अटैक के जरिए डेटा चुराने के बाद अपराधी न केवल पीड़ित के बैंक खाते में जमा जमापूंजी को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर रहे हैं, बल्कि एक और बड़ा खेल खेल रहे हैं। ठग पीड़ितों के पैन कार्ड, आधार कार्ड और फोन नंबर का गलत इस्तेमाल करके विभिन्न ऑनलाइन लेंडिंग ऐप्स से उनके नाम पर लाखों रुपए का पर्सनल लोन भी ले रहे हैं। इसके कारण पीड़ित व्यक्ति को न सिर्फ अपनी जमापूंजी से हाथ धोना पड़ रहा है, बल्कि वह भविष्य के लिए कर्ज के जाल में भी फंस रहा है।
सोशल मीडिया के किसी भी क्रेज के पीछे अंधे न बनें, सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये तरीके
पुलिस प्रशासन ने युवाओं और आम इंटरनेट उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चलने वाले किसी भी अस्थाई ट्रेंड के पीछे इस कदर अंधे न हों कि अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठें। साइबर सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने सुरक्षित रहने के लिए कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:
- किसी भी अनजाने नंबर से आए ‘पार्टी ज्वाइन करने’ या ‘रजिस्ट्रेशन करने’ वाले लिंक पर भूलकर भी क्लिक न करें।
- अगर कोई लिंक आपको किसी अनधिकृत वेबसाइट पर ले जाता है या एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करने को कहता है, तो उसे तुरंत ब्लॉक कर दें।
- अपने मोबाइल फोन में हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें और समय-समय पर अपने नेट बैंकिंग के पासवर्ड बदलते रहें।
- यदि अनजाने में किसी ऐसे लिंक पर क्लिक हो गया है, तो तुरंत अपना इंटरनेट बंद करें और नजदीकी साइबर सेल या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।



