Vedanta Power Plant Accident: वेदांता प्लांट हादसा: अब तक 14 मजदूरों की मौत, बॉयलर फटने के बाद प्रबंधन और ठेकेदार पर कड़ा पहरा

Vedanta Power Plant Accident: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक बेहद दुखद खबर आई है। सिंघीतराई में स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार को जो बॉयलर ब्लास्ट हुआ था, उसकी भयावहता अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। मलबे और अस्पताल से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों का आंकड़ा बढ़कर 14 हो गया है। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज दूर तक सुनी गई और प्लांट का एक हिस्सा पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो गया। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित इलाके को सील कर दिया है और विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर सुराग जुटा रही है।

मजिस्ट्रियल जांच के आदेश और डभरा एसडीएम को कमान

Sakthi News: हादसे की गंभीरता को देखते हुए सक्ती कलेक्टर अमृत टोपनो ने इस पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराने का फैसला किया है। इसकी जिम्मेदारी डभरा के एसडीएम को सौंपी गई है जिन्हें एक महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। जांच के लिए कुल 8 बिंदु तय किए गए हैं जिनमें यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने समय पर प्लांट का निरीक्षण किया था या नहीं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हादसे के पीछे की असली तकनीकी वजह और मानवीय चूक सबके सामने आए।

घायलों की स्थिति और रायपुर में विशेष इलाज

धमाके में झुलसे मजदूरों की हालत काफी नाजुक बनी हुई है। चार गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को तुरंत रायपुर के कालड़ा बर्न हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद दो मजदूरों को मृत घोषित कर दिया जबकि बाकी दो अब भी आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इनके अलावा रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों में 15 अन्य घायलों का उपचार चल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि घायलों के इलाज में कोई कमी न छोड़ी जाए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की राय ली जाए।

मुआवजे पर बनी सहमति और सरकार की बड़ी घोषणा

हादसे के बाद प्लांट प्रबंधन और मजदूरों के परिवारों के बीच मुआवजे को लेकर लंबी चर्चा हुई। सहमति के बाद कंपनी ने हर मृतक के परिवार को 35 लाख रुपये और घायलों को 15 लाख रुपये देने का वादा किया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने अपनी ओर से मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से भी सहायता राशि का आश्वासन दिया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई भी कीमत इन परिवारों के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती।

सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी NGSL की भूमिका पर उठे सवाल

वेदांता प्लांट प्रबंधन ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि जिस बॉयलर यूनिट में यह विस्फोट हुआ, उसके संचालन की पूरी जिम्मेदारी सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी एनजीएसएल (NGSL) के पास थी। कंपनी का दावा है कि हताहत हुए सभी मजदूर इसी ठेकेदार कंपनी के कर्मचारी थे। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ठेकेदार पर दोष मढ़कर मुख्य प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से हाथ नहीं खींच सकता। जांच टीम अब यह देख रही है कि क्या मुख्य कंपनी ने ठेकेदार के कामकाज और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की थी।

औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी और सिस्टम की पोल

सक्ती जिले के इस हादसे ने एक बार फिर यह कड़वा सच उजागर किया है कि उद्योगों में सुरक्षा नियम अक्सर केवल कागजों तक ही सीमित रहते हैं। यदि समय-समय पर बॉयलर की फिटनेस जांच और सुरक्षा ऑडिट किया जाता, तो शायद 14 मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। सवाल उन सरकारी विभागों पर भी उठ रहे हैं जिनकी जिम्मेदारी इन प्लांटों की निगरानी करना है। क्या विभाग केवल बड़े हादसों का इंतजार करता है या फिर भ्रष्टाचार की वजह से सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को नजरअंदाज किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री का सख्त रुख

प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने साफ कर दिया है कि इस मामले के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने श्रम कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की बात कही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। सरकार अब इस कोशिश में है कि उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए ताकि फिर कोई परिवार बेसहारा न हो।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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