
CSMCL Overtime Scam: छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में करोड़ों रुपये के ओवरटाइम भुगतान घोटाले को लेकर जांच एजेंसियों ने अपना शिकंजा कस दिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए बड़े स्तर पर दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी।
भ्रष्टाचार की धाराएं और कानूनी शिकंजा
अधिकारियों के अनुसार यह पूरी कार्रवाई अपराध क्रमांक 44/2024 के तहत की गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता के तहत जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं। इन पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं, जिसके आधार पर एजेंसियों ने इनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने का दावा किया है।
115 करोड़ का हिसाब और फर्जी बिलिंग
घोटाले की जांच के दौरान यह पता चला कि साल 2019 से 2024 के बीच मैनपावर एजेंसियों को करीब 115 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। यह पैसा कर्मचारियों के ओवरटाइम के नाम पर जारी हुआ था। प्राथमिक जांच में पाया गया कि एजेंसियों ने फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बिल पेश किए ताकि शासन से अधिक राशि निकाली जा सके। सरकारी पैसे का इस तरह से अवैध आहरण कर विभाग को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है।
कमीशन का खेल और मजदूरों की हकमारी
जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जो पैसा कर्मचारियों के पसीने की कमाई के तौर पर जारी किया गया था वह असल में उन तक पहुंचा ही नहीं। अधिकारियों का आरोप है कि इस रकम का एक बड़ा हिस्सा एजेंसियों ने खुद रख लिया और बाकी पैसा CSMCL के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों को कमीशन के रूप में बांट दिया गया। यह एक संगठित अपराध की तरह संचालित हो रहा था जिसमें पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की सूची
EOW और ACB ने जिन आरोपियों को इस घोटाले में संलिप्त पाया है उनके नाम और पद इस प्रकार हैं:
- नीरज कुमार चौधरी: वित्त एवं कर सलाहकार।
- अजय लोहिया: डायरेक्टर, अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड।
- अजीत दरंदले: डायरेक्टर, सुमीत फैसिलिटिज कंपनी।
- अमित प्रभाकर सालुंके: डायरेक्टर।
- अमित मित्तल: चेयरमैन एवं डायरेक्टर, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड।
- राजीव द्विवेदी: डायरेक्टर, प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड।
- संजीव जैन: डायरेक्टर, प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड।
ईडी की सूचना से शुरू हुई जांच
इस घोटाले की नींव पिछले साल पड़ी थी जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 नवंबर 2023 को तीन लोगों से करीब 28.80 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। ईडी ने इस संदिग्ध लेनदेन की जानकारी राज्य सरकार को भेजी थी। इसी इनपुट के आधार पर राज्य की जांच एजेंसियों ने एफआईआर दर्ज की और जब कड़ियों को जोड़ा गया तो 115 करोड़ रुपये के इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।
कोर्ट से मिली पुलिस रिमांड और आगे की तैयारी
गिरफ्तार किए गए सभी सातों आरोपियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें 11 मई 2026 तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। रिमांड की इस अवधि में जांच एजेंसियां आरोपियों से फर्जी बिलिंग के नेटवर्क और इस खेल में शामिल अन्य सफेदपोशों के बारे में पूछताछ करेंगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।



