Electricity Prepaid System: अब रिचार्ज कराने पर ही मिलेगी बिजली, छत्तीसगढ़ में बिजली प्रीपेड सिस्टम

छत्तीसगढ़ में बिजली के इस्तेमाल को लेकर शासन एक बहुत बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब राज्य में मोबाइल फोन की तरह ही बिजली का उपयोग करने के लिए भी पहले रिचार्ज कराना होगा। छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी की ओर से भेजे गए इस प्रस्ताव को राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इसके तहत अब सिलसिलेवार तरीके से सभी बिजली कनेक्शनों को प्रीपेड सिस्टम से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

पहले चरण में सरकारी दफ्तर शामिल

इस नई योजना की शुरुआत सबसे पहले सरकारी विभागों से की जा रही है। एक अप्रैल से ब्लॉक स्तर के सभी सरकारी बिजली कनेक्शनों को प्रीपेड कर दिया जाएगा। इस काम को पूरा करने के लिए दफ्तरों में बहुत तेजी से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। कुल 1 लाख 72 हजार सरकारी कनेक्शनों में से करीब डेढ़ लाख मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं। बचे हुए लगभग 22 हजार मीटर लगाने का काम भी पूरा होने वाला है जिनमें मुख्य रूप से पंचायत भवन और आंगनबाड़ी केंद्र शामिल हैं।

तीन हजार करोड़ से ज्यादा का बकाया

शासन को यह कड़ा कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि सरकारी विभागों पर बिजली का बिल लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते कुछ समय में यह बकाया बहुत तेजी से बढ़कर अब लगभग 3000 करोड़ रुपये के पार पहुँच चुका है। आशंका जताई जा रही है कि मार्च के अंत तक यह उधारी 3500 करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है। इसमें सबसे ज्यादा राशि नगरीय निकायों की है जिन पर करीब 2000 करोड़ रुपये का बिल बाकी है। इसके अलावा विकास विभाग पर भी 600 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी बनी हुई है।

किस्तों में चुकाई जाएगी पुरानी उधारी

सरकारी दफ्तरों के इस भारी-भरकम बिल को चुकाने के लिए सरकार ने एक रास्ता निकाला है। विभागों के सालाना बजट से काटकर किस्तों में इस पैसे का भुगतान किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत पॉवर कंपनी को पहली किस्त के रूप में 600 करोड़ रुपये की राशि मिल भी चुकी है। इससे कंपनी को अपने वित्तीय संकट से उबरने में थोड़ी मदद मिलेगी।

तीन महीने का एडवांस देना होगा जरूरी

नए नियम के लागू होने के बाद अब सभी सरकारी विभागों को अपने औसत मासिक बिल के हिसाब से तीन महीने का एडवांस रिचार्ज कराना होगा। इसका मतलब यह है कि दफ्तर का हर महीने जितना भी औसत खर्च आता है उसे जोड़कर तीन गुना राशि पहले ही खाते में जमा करनी होगी। यह रिचार्ज खत्म होने से पहले ही अगले तीन महीनों के लिए फिर से एडवांस भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि दफ्तरों की बिजली चालू रहे।

आम जनता के लिए भी लागू हो सकता है नियम

सरकारी विभागों में इस व्यवस्था के सफल होने के बाद आने वाले समय में इसे आम उपभोक्ताओं पर भी लागू किया जा सकता है। इससे न केवल समय पर बिजली बिल की पूरी वसूली हो सकेगी बल्कि उधारी जमा होने की समस्या भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। प्रीपेड मीटर लगने से बिजली की फिजूलखर्ची रोकने में भी काफी हद तक मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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