
Census Guidelines: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से आगामी राष्ट्रीय जनगणना को लेकर बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिला प्रशासन ने जनगणना के काम को बिना किसी अड़चन के पूरा करने के लिए नागरिकों और प्रगणकों (डेटा जुटाने वाले कर्मचारियों) के लिए जरूरी नियम जारी कर दिए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जनगणना के दौरान हर नागरिक का यह कानूनी फर्ज होगा कि वह पूछे गए सभी जरूरी सवालों के बिल्कुल सही जवाब दे। इसके साथ ही एक और सख्त नियम बनाया गया है, जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति अपने मकान की दीवार पर प्रगणक द्वारा लिखे गए जनगणना नंबर या पहचान चिन्ह को जानबूझकर मिटाता है या उसे नुकसान पहुंचाता है, तो उसके खिलाफ सीधे तौर पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ गृह विभाग की अधिसूचना जारी, सामाजिक परंपराओं का रखा जाएगा पूरा ध्यान
दुर्ग जिला प्रशासन ने यह नई गाइडलाइन छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग से प्राप्त आधिकारिक अधिसूचना के बाद जारी की है। इस नियम में साफ तौर पर कहा गया है कि जनगणना टीम को हर घर में सर्वे करने और मकानों पर जरूरी नंबर अंकित करने की अनुमति देनी होगी। हालांकि, नियमों को तय करते समय स्थानीय सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक रूढ़ियों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। इसके तहत किसी भी विवाहित या विधवा महिला को उसके पति का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। इसी तरह, यदि कोई नागरिक अपनी स्थानीय परंपरा के कारण परिवार के कुछ सदस्यों के नाम सीधे तौर पर उजागर नहीं करना चाहता, तो प्रगणक उसके साथ किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती नहीं कर सकेंगे।
प्रगणकों के लिए भी तय हुई सीमा, तय सवालों के अलावा फालतू पूछताछ पर लगी रोक
प्रशासन ने जनता को सहूलियत देने के साथ-साथ फील्ड में काम करने वाले प्रगणकों की जिम्मेदारी और मर्यादा भी तय कर दी है। कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे नागरिकों के घर जाकर पूरी शालीनता से बात करें। प्रगणक केवल वही सवाल पूछ सकते हैं जो केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र (गजट) में पहले से मंजूर और निर्धारित किए गए हैं। उन्हें किसी भी नागरिक से उनकी निजी जिंदगी को लेकर अनावश्यक या अतिरिक्त पूछताछ करने का कोई अधिकार नहीं होगा। इसके अलावा, यदि कोई प्रगणक अपनी ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतता है या सर्वे का काम करने से मना करता है, तो उसके खिलाफ भी विभागीय स्तर पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गलत जानकारी देने या काम रोकने पर एक हजार का जुर्माना, तीन साल तक की हो सकती है जेल
इस राष्ट्रीय अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतने वालों के लिए प्रशासन ने कड़े दंड का प्रावधान किया है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर जनगणना टीम को गुमराह करता है, गलत आंकड़े लिखवाता है, या अपने घर पर लिखे गए नंबर को खुरचकर मिटाता है, तो उस पर एक हजार रुपये का नगद जुर्माना ठोका जाएगा। बात यहीं खत्म नहीं होती, यदि कोई व्यक्ति प्रगणकों के काम में रोड़ा अटकाता है, उनके साथ अभद्र व्यवहार करता है या जनगणना कार्यालयों में बिना अनुमति घुसकर हंगामा करता है, तो जुर्माना भरने के साथ-साथ उसे अधिकतम तीन साल तक की जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।
पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे आपके आंकड़े, सरकारी योजनाएं और नीतियां बनाने में होगा उपयोग
अक्सर आम जनता के मन में यह डर रहता है कि उनके द्वारा दी गई निजी जानकारी का कहीं गलत इस्तेमाल न हो जाए। इस भ्रम को दूर करते हुए दुर्ग जिला प्रशासन ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान जुटाए गए सभी आंकड़े पूरी तरह से गुप्त (गोपनीय) रखे जाएंगे। इन जानकारियों को किसी भी दीवानी या आपराधिक मामले में देश की किसी भी अदालत के भीतर सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता है। इन आंकड़ों का एकमात्र प्राथमिक उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के लिए सटीक विकास योजनाएं तैयार करने, सरकारी बजट का आवंटन करने और प्रशासनिक क्षेत्रों के परिसीमन के लिए किया जाता है। प्रशासन ने सभी से इस काम में पूरा सहयोग करने की अपील की है।



