
दुनिया भर के मौसम विज्ञानी इस समय एक ऐसी प्राकृतिक आहट से चिंतित हैं जो आने वाले समय में तबाही का सबब बन सकती है। साल 1877 के बाद पहली बार अब तक का सबसे ताकतवर अल-नीनो आकार ले रहा है। अनुमान है कि साल 2026-27 के दौरान यह अपना सबसे खौफनाक रूप दिखाएगा। इतिहास के पन्ने पलटें तो करीब 140 साल पहले जब ऐसा महाविनाशकारी अल-नीनो आया था, तब पूरी पृथ्वी पर भयंकर अकाल और महामारियां फैली थीं। उस दौरान दुनिया की लगभग 4 प्रतिशत आबादी को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस बार भी समुद्र के तापमान में हो रही असामान्य बढ़ोतरी ‘सुपर अल-नीनो’ के आने का संकेत दे रही है।
प्रशांत महासागर में 8 हजार किलोमीटर लंबी गर्मी की लहर
मौसम वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर के एक बड़े हिस्से में लगभग 8 हजार किलोमीटर लंबी गर्म पानी की लहर देखी है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘द ब्लॉब’ कहा जा रहा है। यह विशाल लहर अल-नीनो की शक्ति को कई गुना बढ़ा रही है जिससे पूरी दुनिया के मौसम का चक्र पूरी तरह बिगड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि यह ‘मेगा अल-नीनो’ अपने चरम पर पहुंचता है, तो साल 2027 तक गर्मी के पिछले सभी वैश्विक रिकॉर्ड ध्वस्त हो जाएंगे। इसका सीधा असर न केवल इंसानी जीवन पर पड़ेगा बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
भारत पर मंडराया सूखे और कमजोर मानसून का खतरा
भारत के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है क्योंकि हमारा देश इस सुपर अल-नीनो के प्रभाव क्षेत्र में सीधे तौर पर आता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल भारत में गर्मी का मौसम उम्मीद से कहीं ज्यादा तपिश भरा रहेगा। उत्तर भारत के कई राज्यों में पारा अभी से ही सामान्य से ऊपर जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है क्योंकि अल-नीनो अक्सर मानसून की बारिश को रोक देता है। यदि जून से सितंबर के दौरान बारिश की कमी रहती है, तो देश के बड़े हिस्से में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं जिससे अनाज उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।
खेती-किसानी और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश और अत्यधिक तापमान का सबसे बुरा असर फसलों पर पड़ेगा। धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए पानी की भारी कमी हो सकती है। सूखे की स्थिति में न केवल किसानों की आमदनी घटेगी बल्कि बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतें भी तेजी से बढ़ सकती हैं। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए अल-नीनो का यह बदला हुआ रूप किसी बड़ी आर्थिक चुनौती से कम नहीं है। सरकार को अभी से जल प्रबंधन और अनाज के भंडारण को लेकर ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है।
स्वास्थ्य और बचाव के लिए अभी से सतर्कता जरूरी
बदलते मौसम के इस मिजाज को देखते हुए आम लोगों को भी अपनी जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी और लू (Heatwave) से बचने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया है क्योंकि अत्यधिक तापमान से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं दूसरी ओर पानी की किल्लत से निपटने के लिए शहरी और ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण के अभियानों को तेज करना होगा। अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह सुपर अल-नीनो आने वाले वर्षों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है।



