
Dhamtari Kharif Season Fertilizer: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले सहित पूरे प्रदेश के किसानों के लिए खरीफ सीजन 2026 से जुड़ी एक बेहद जरूरी खबर आई है। राज्य सरकार ने सहकारी समितियों (सोसायटियों) के माध्यम से खरीफ फसलों के लिए रासायनिक खादों के वितरण की नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खेती के पीक सीजन में अन्नदाताओं को बिना किसी परेशानी के समय पर खाद उपलब्ध कराना है। प्रशासन ने इस बार समानुपातिक वितरण पर जोर दिया है ताकि किसी एक जगह खाद की किल्लत न हो और कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके। इसके साथ ही सरकार का ध्यान किसानों की खेती की लागत को कम करने और जमीन की उपजाऊ क्षमता को सुरक्षित रखने पर भी है।
केमिकल खाद के साथ जैविक खेती पर फोकस, हरी खाद और नीलहरित काई को मिलेगा बढ़ावा
कृषि विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि खेतों में केवल रासायनिक उर्वरकों पर ही निर्भरता न रहे। इस बार सोसायटियों के माध्यम से रासायनिक खादों के साथ-साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद और नीलहरित काई की बिक्री को भी तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि केमिकल खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से खेतों की सेहत खराब हो रही है। इसलिए, जैविक विकल्पों को बढ़ावा देकर मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, जिससे फसलों की पैदावार भी बेहतर होगी।
यूरिया और डीएपी वितरण का नया फॉर्मूला तय, शुरुआती चरण में मिलेगी इतनी मात्रा
सरकार ने इस साल खाद की संभावित मांग और उपलब्धता को देखते हुए एक नया सप्लाई फॉर्मूला तैयार किया है। पिछले साल यानी खरीफ 2025 में किसानों द्वारा उठाए गए कुल कोटे को आधार माना गया है। इसके तहत खरीफ 2026 के शुरुआती चरण में प्रत्येक किसान को उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर यूरिया की 80 प्रतिशत और डीएपी की 60 प्रतिशत मात्रा प्रारंभिक रूप से वितरित की जाएगी। बाकी बची हुई यूरिया की मात्रा को जरूरत के अनुसार पारंपरिक बोरी या फिर नैनो यूरिया (लिक्विड) के रूप में दिया जाएगा, जबकि डीएपी की शेष मात्रा स्टॉक की उपलब्धता के आधार पर बांटी जाएगी।
बड़े किसानों के लिए बदले नियम, 5 एकड़ से अधिक जमीन वालों को तीन किस्तों में मिलेगा कोटा
छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रशासन ने जोनिंग व्यवस्था लागू की है। इस नए नियम के तहत जिन किसानों के पास 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि है, उन्हें यूरिया का उठाव एक बार में करने की अनुमति नहीं होगी। बड़े रकबे वाले ऐसे किसानों को यूरिया की कुल पात्रता तीन अलग-अलग किस्तों में दी जाएगी। प्रशासन ने व्यवस्था बनाई है कि प्रत्येक किस्त के वितरण के बीच कम से कम 20 दिनों का अनिवार्य अंतर होना चाहिए। इस कदम से सोसायटियों में अचानक आने वाले वीआईपी दबाव को कम किया जा सकेगा और छोटे किसानों को आसानी से खाद मिल सकेगी।
पिछले साल के रिकॉर्ड से तय होगी पात्रता, दशमलव की संख्या को माना जाएगा निकटतम पूर्णांक
समितियों में खाद वितरण के दौरान किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए स्पष्ट किया गया है कि किस किसान को कितनी बोरी खाद मिलेगी, यह पूरी तरह उनके पिछले साल के उठान पर निर्भर करेगा। पात्रता की गणना करते समय यदि बोरियों की संख्या दशमलव में आती है, तो उसे निकटतम पूर्णांक (राउंड फिगर) में बदलकर मान्य किया जाएगा। कृषि विभाग के मैदानी अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खाद नियंत्रण आदेश 1985 के कड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराएं। पूरी वितरण व्यवस्था को ऑनलाइन और पारदर्शी रखने को कहा गया है ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद डालने की अपील, संतुलित उपयोग से बचेगी लागत
जिला प्रशासन और कृषि वैज्ञानिकों ने धमतरी जिले के सभी किसान भाइयों से एक विशेष अपील भी की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान अपने खेतों में आंख मूंदकर यूरिया या डीएपी का छिड़काव न करें। सबसे पहले अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण (मृदा परीक्षण) कराएं और सॉइल हेल्थ कार्ड में आई रिपोर्ट के आधार पर ही संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें। संतुलित मात्रा में सही खाद डालने से न केवल फसलों को सही पोषण मिलता है, बल्कि बाजार से अनावश्यक खाद खरीदने का खर्च भी बच जाता है, जिससे सीधे तौर पर किसानों की आमदनी में सुधार होगा।



