
CG Private School Fee: छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय ने निजी स्कूलों द्वारा वसूली जा रही मनमानी फीस पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। विभाग ने फीस विनियमन अधिनियम के तहत सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पिछले कुछ समय से सरकार को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई स्कूल नियमों की अनदेखी कर अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने अब सीधी कार्रवाई का मन बना लिया है।
फीस विनियमन समिति का गठन हुआ अनिवार्य
प्रशासन ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 17 अप्रैल 2026 तक हर निजी स्कूल में फीस विनियमन समिति के गठन की जांच पूरी करें। जिन स्कूलों ने अब तक इस समिति का निर्माण नहीं किया है उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है इसकी रिपोर्ट भी तलब की गई है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर स्कूल में एक ऐसी व्यवस्था मौजूद हो जहां फीस तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के दायरे में रहे।
पिछले तीन वर्षों के रिकॉर्ड का होगा ऑडिट
शिक्षा विभाग ने केवल वर्तमान सत्र ही नहीं बल्कि पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। सत्र 2024-25 से लेकर 2026-27 तक जिला स्तरीय शुल्क समितियों की बैठकों का पूरा विवरण मांगा गया है। सरकार ने सवाल किया है कि पिछले तीन सालों में जिला स्तरीय समितियों ने कितनी बैठकें की और फीस निर्धारण को लेकर क्या फैसले लिए गए। इस ऑडिट के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि स्कूलों ने किस आधार पर फीस में बढ़ोतरी की और क्या वह नियमों के अनुकूल थी।
नोटिस बोर्ड पर फीस दिखाना अब जरूरी
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश दिया है कि हर स्कूल को अपने नोटिस बोर्ड पर निर्धारित शुल्क की जानकारी सार्वजनिक रूप से लगानी होगी। इससे अभिभावकों को यह स्पष्ट रहेगा कि स्कूल प्रशासन शासन द्वारा तय मानकों के तहत ही फीस ले रहा है। विभाग ने यह भी रिपोर्ट मांगी है कि स्कूलों में फीस तय करने के लिए हर साल नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं या नहीं। नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों की सूची तैयार की जा रही है।
लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई
लोक शिक्षण संचालनालय के उप संचालक ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर तत्काल आवश्यक कदम उठाने को कहा है। जारी आदेश में साफ किया गया है कि फीस नियंत्रण के नियमों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो स्कूल नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे या जिन्होंने जानबूझकर समिति नहीं बनाई है उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मनमानी करने वाले स्कूलों की मान्यता पर भी गाज गिर सकती है।
अभिभावकों को आर्थिक राहत देने की कोशिश
सरकार के इस कड़े कदम का मुख्य उद्देश्य निजी स्कूल संचालकों की मनमानी रोकना और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत पहुँचाना है। विभाग की इस सख्ती के बाद अब निजी स्कूलों को अपनी आय और फीस का पूरा हिसाब सरकारी तंत्र के सामने रखना होगा। आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग की टीमें स्कूलों का औचक निरीक्षण भी कर सकती हैं ताकि यह देखा जा सके कि नोटिस बोर्ड पर जानकारी दी गई है या नहीं। अब देखना होगा कि इस आदेश के बाद निजी स्कूलों की कार्यशैली में कितना सुधार आता है।



