
Naxal-Free India: केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को एक औपचारिक पत्र भेजकर देश को नक्सल मुक्त घोषित करने की दिशा में बड़ी जानकारी साझा की है। गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पिछले पांच दशकों से जारी वामपंथी उग्रवाद अब अपने अंत पर है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हालिया सुरक्षा समीक्षा के बाद अब देश का एक भी जिला नक्सल हिंसा प्रभावित श्रेणी में शामिल नहीं है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल और साल 2015 में तैयार की गई राष्ट्रीय कार्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है।
सुरक्षा समीक्षा के बाद बदली जिलों की स्थिति
गृह मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में देश के नक्सल प्रभावित इलाकों की सुरक्षा स्थिति का गहन विश्लेषण किया था। अधिकारियों ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक की स्थिति को आधार मानकर की गई इस समीक्षा में यह पाया गया कि सुरक्षा बलों के निरंतर दबाव और विकास कार्यों ने उग्रवाद की जड़ें काट दी हैं। इससे पहले मार्च के अंतिम सप्ताह में हुई बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ का बीजापुर और झारखंड का पश्चिम सिंहभूम दो ऐसे जिले थे जो इस सूची में बचे हुए थे। अब ताजा आंकड़ों के अनुसार इन दोनों जिलों में भी सक्रिय नक्सली हिंसा पर पूरी तरह लगाम लगा ली गई है।
विरासत और विकास जिलों की नई पहचान
मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की सरकारों को सूचित किया है कि अब 37 जिलों को ‘विरासत और विकास जिलों’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ये वे इलाके हैं जो कभी नक्सली हिंसा का गढ़ हुआ करते थे लेकिन अब वहां शांति बहाल हो चुकी है। सरकार इन क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास की निरंतरता बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास जारी रखेगी। इन जिलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि भविष्य में अशांति की कोई गुंजाइश न रहे।
पश्चिम सिंहभूम अब चिंताजनक श्रेणी में शामिल
झारखंड का पश्चिम सिंहभूम जिला फिलहाल देश का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जिसे सरकार ने ‘चिंताजनक जिले’ की सूची में रखा है। गृह मंत्रालय के मुताबिक चिंताजनक जिला वह होता है जहां उग्रवादियों की संगठनात्मक संरचना को ध्वस्त कर दिया गया है और हिंसा पर भी काबू पा लिया गया है लेकिन वहां निकट भविष्य में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। इस जिले में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनी रहेगी और विकास योजनाओं की निगरानी भी कड़ी रखी जाएगी ताकि नक्सली तत्व दोबारा सक्रिय न हो सकें।
59 साल पुराने खूनी संघर्ष का हुआ समापन
नक्सलवाद का इतिहास साल 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ था। वहां से भड़की यह चिंगारी धीरे-धीरे देश के कई राज्यों में फैल गई और लाल गलियारे का रूप ले लिया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन दशकों के दौरान हुई हिंसा में अब तक 17,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जिनमें आम नागरिक और सुरक्षा बलों के जवान शामिल हैं। गृह मंत्रालय की यह ताजा घोषणा देश के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत है जिससे अब इन क्षेत्रों में सड़क, स्कूल और अस्पतालों के निर्माण में तेजी आएगी।
केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों को मिली सफलता
गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में इस सफलता का श्रेय सुरक्षा बलों के बलिदान और राज्य पुलिस के साथ बेहतर समन्वय को दिया है। सरकार का मानना है कि केवल बंदूकों के दम पर नहीं बल्कि दूरदराज के गांवों तक बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी सुविधाएं पहुंचाकर ही इस समस्या का समाधान संभव हो पाया है। वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए अपनाई गई जीरो टॉलरेंस की नीति ने उग्रवादियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म कर दिया है। अब सरकार का पूरा ध्यान इन पूर्व प्रभावित जिलों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।



