CG Forest Rights PESA Act Task Force: छत्तीसगढ़ में जल-जंगल-जमीन के अधिकारों पर सरकार का बड़ा कदम: सीएम की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित, पेसा और वन अधिकार कानून में आएगी तेजी

CG Forest Rights PESA Act Task Force: छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों और वनवासियों को उनके अधिकार दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य शासन ने वन अधिकार अधिनियम और पेसा (PESA) कानून के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स और क्रियान्वयन समिति का गठन किया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बनी इस 17 सदस्यीय टास्क फोर्स का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना होगा कि पात्र हितग्राहियों को जमीन और संसाधनों के कानूनी अधिकार समय पर मिल सकें। इस पहल से वर्षों से लंबित पड़े प्रकरणों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

टास्क फोर्स का ढांचा और कार्यकाल

इस विशेष कार्य बल को शासन ने स्पष्ट ढांचे और समय सीमा के साथ तैयार किया है। इसका उद्देश्य केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर धरातल पर बदलाव लाना है।

  • अध्यक्षता: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं इस 17 सदस्यीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष होंगे।
  • समिति नेतृत्व: मुख्य सचिव की अगुवाई में एक अलग क्रियान्वयन समिति बनाई गई है जो जमीनी स्तर पर कार्यों की देखरेख करेगी।
  • कार्यकाल: टास्क फोर्स का कार्यकाल दो वर्ष के लिए निर्धारित किया गया है।
  • बैठकें: समूह को एक साल में कम से कम दो अनिवार्य बैठकें करनी होंगी ताकि प्रगति की समीक्षा की जा सके।
  • भत्ते: समिति के सदस्यों को यात्रा और अन्य नियमानुसार भत्ते प्रदान किए जाएंगे।

संभावित क्षेत्रों की मैपिंग और चिन्हांकन

टास्क फोर्स की एक बड़ी जिम्मेदारी उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों (CFRR) का प्रावधान लागू होना है। इसके लिए प्रदेश के संभावित क्षेत्रों की जिलेवार मैपिंग की जाएगी। टीम उन नए इलाकों की भी पहचान करेगी जिन्हें अब तक चिन्हित नहीं किया गया था। इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो पाएगा कि किन पंचायतों और ग्राम सभाओं को कानून के तहत अधिकार मिलने चाहिए।

लंबित मामलों की समीक्षा और जिला स्तर पर जवाबदेही

राज्य में वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत कई आवेदन जिला स्तर पर लंबित हैं। टास्क फोर्स इन मामलों का जिलेवार आकलन करेगी और समीक्षा करेगी कि देरी कहां हो रही है। पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला पंचायतों को विशेष रणनीतियां और कार्य योजनाएं सौंपी जाएंगी। टास्क फोर्स यह सुनिश्चित करेगी कि जिला प्रशासन समयबद्ध तरीके से इन कानूनों को लागू करे और जनजातीय समुदायों को उनके अधिकारों से वंचित न रहना पड़े।

प्रभावी कार्य योजना और दिशा-निर्देशों का निर्माण

टास्क फोर्स केवल सुझाव नहीं देगी बल्कि संबंधित विभागों के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश और रणनीतियां भी तैयार करेगी।

  • अनुशंसा: पेसा और वन अधिकार कानूनों के लिए डीएलसी (DLC) और जिला पंचायतों को ठोस कार्य योजना देना।
  • अनुमोदन: शासन और जनजातीय प्रकोष्ठ से समन्वय के बाद प्रस्तावित अनुशंसाओं पर मुहर लगाना।
  • पर्यवेक्षण: कार्य योजना लागू होने के बाद समय-सीमा के भीतर कार्यों का मूल्यांकन और निगरानी करना।
  • समन्वय: राजभवन के जनजातीय प्रकोष्ठ और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना।

वनवासियों के अधिकारों का संरक्षण और जवाबदेही

इस टास्क फोर्स के गठन का अंतिम लक्ष्य प्रदेश के आदिवासियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के हितों की रक्षा करना है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह दल न केवल शासन की नीतियों का मूल्यांकन करेगा बल्कि समय-समय पर नए सुझाव भी देगा ताकि वन अधिकार अधिनियम की मूल भावना को सुरक्षित रखा जा सके। टास्क फोर्स द्वारा दी गई अनुशंसाओं पर संबंधित विभाग अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे जिससे जवाबदेही तय होगी। शासन का मानना है कि इस कदम से राज्य के वनांचलों में सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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