
Thai Mangur Fish Ban: छत्तीसगढ़ के बाजारों में धड़ल्ले से बिक रही थाई मांगुर और बिग हेड मछली अब आम लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग और मत्स्य पालन विभाग की बार-बार चेतावनी के बावजूद, कम कीमत और बाजार में आसानी से मिलने के कारण लोग अनजाने में इन खतरनाक मछलियों को खरीद रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने साफ किया है कि इन विदेशी प्रजाति की मछलियों को खाने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। मानव स्वास्थ्य और स्थानीय जलीय पर्यावरण को होने वाले भारी नुकसान को देखते हुए दुर्ग जिला प्रशासन ने इन दोनों मछलियों पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह बैन लगा दिया है।
बीज उत्पादन से लेकर परिवहन तक सब बंद, कलेक्टर ने जारी किए सख्त आदेश
दुर्ग के कलेक्टर अभिजीत सिंह ने इस संबंध में एक कड़ा आधिकारिक आदेश जारी किया है। नए सरकारी आदेश के तहत अब पूरे जिले के भीतर थाई मांगुर और बिग हेड मछली के बीज उत्पादन, उनके व्यावसायिक पालन, संवर्धन, बाजार में क्रय-विक्रय और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने (परिवहन) पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि कोई भी मछुआरा, व्यापारी या बिचौलिया इस प्रतिबंध का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
दूषित पानी और सड़ा मांस खाकर बढ़ती हैं ये मछलियां, शरीर में जमा हो जाता है धीमा जहर
मत्स्य पालन विभाग के वैज्ञानिकों ने इन दोनों मछलियों की शारीरिक बनावट और खान-पान को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक थाई मांगुर और बिग हेड ऐसी मांसाहारी प्रजातियां हैं जो बेहद गंदे और दूषित पानी में भी आसानी से जिंदा रह लेती हैं। ये तालाबों के नीचे जमा खतरनाक अपशिष्ट, सड़े-गले मांस और हानिकारक रसायनों को खाकर बहुत तेजी से बड़ी होती हैं। इस गंदे खान-पान की वजह से इनके मांस के भीतर भारी मात्रा में लेड, मरकरी और अन्य विषैले तत्व जमा हो जाते हैं, जो इंसानी शरीर में जाकर धीमे जहर की तरह काम करते हैं।
लगातार सेवन से बढ़ जाता है कैंसर का खतरा, पेट और त्वचा की गंभीर बीमारियां होना तय
अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टरों और कैंसर विशेषज्ञों ने भी इन मछलियों को लेकर नागरिकों को अलर्ट किया है। डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग लगातार थाई मांगुर या बिग हेड मछली का सेवन कर रहे हैं, उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। इन मछलियों में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन्स के कारण पेट का कैंसर, लिवर का खराब होना और त्वचा से जुड़ी कई गंभीर और लाइलाज बीमारियां होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। इसी वजह से चिकित्सा जगत ने इन्हें इंसानी खान-पान के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त घोषित किया है।
देशी मछलियों का वजूद मिटा रही हैं ये विदेशी प्रजातियां, जैव विविधता को पहुंच रहा नुकसान
पारिस्थितिकी तंत्र के लिहाज से भी ये मछलियां जलीय जीवों के लिए काल साबित हो रही हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ये विदेशी मांसाहारी मछलियां बेहद आक्रामक स्वभाव की होती हैं। ये जिन तालाबों या नदियों में छोड़ी जाती हैं, वहां मौजूद हमारी पारंपरिक और उन्नत नस्ल की देशी मछलियों और उनके अंडों को पूरी तरह खाकर खत्म कर देती हैं। इससे जल स्रोतों की प्राकृतिक जैव विविधता पूरी तरह नष्ट हो रही है और स्थानीय मछुआरों को मिलने वाली अच्छी नस्ल की देशी मछलियों का वजूद ही खतरे में पड़ गया है।
बाजारों और तालाबों पर औचक छापा मारेगा विशेष उड़नदस्ता, मौके पर ही नष्ट होगा स्टॉक
इस सरकारी प्रतिबंध को धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए मत्स्य पालन विभाग ने एक विशेष उड़नदस्ता दल (स्क्वाड) तैयार किया है। यह टीम जिले के सभी प्रमुख मछली बाजारों, ग्रामीण तालाबों, निजी हैचरी और परिवहन में लगे वाहनों की लगातार और औचक निगरानी करेगी। जांच के दौरान यदि किसी भी जगह पर प्रतिबंधित थाई मांगुर या बिग हेड मछली जीवित या मृत हालत में पाई जाती है, तो टीम पूरा स्टॉक तत्काल मौके पर ही जब्त कर लेगी और उसे रिहायशी इलाकों से दूर ले जाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।
नियम तोड़ने पर दर्ज होगी पुलिस एफआईआर, एक साल की जेल और भारी जुर्माने का है प्रावधान
प्रशासन ने इस बार कार्रवाई को केवल जब्ती तक सीमित न रखकर सीधे जेल भेजने की तैयारी की है। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले मत्स्य पालकों, थोक व्यापारियों, होटल संचालकों और ढाबा मालिकों के खिलाफ संबंधित थानों में सीधे नामजद एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को एक वर्ष तक का कठोर कारावास, 10 हजार रुपये का नगद जुर्माना या फिर ये दोनों सजाएं एक साथ भुगतनी पड़ सकती हैं। सरकार की इस सख्ती से अवैध मछली कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।



