Dongargarh Sushasan Tihar Protest: सुशासन तिहार में भारी हंगामा: डोंगरगढ़ में अधिकारियों को बनाया बंधक, पट्टे की मांग पर भड़के लोग, पुलिस ने किया बल प्रयोग

Dongargarh Sushasan Tihar Protest: छत्तीसगढ़ की साय सरकार जनता की शिकायतों के निपटारे के लिए ‘सुशासन तिहार’ अभियान चला रही है, लेकिन राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में इस कार्यक्रम के दौरान जमकर बवाल हो गया। वार्ड क्रमांक-5 के आंबेडकर भवन में आयोजित समाधान शिविर में उस समय माहौल गरमा गया जब स्थानीय निवासियों ने बरसों से लंबित पट्टा वितरण की मांग उठाई। अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। देखते ही देखते शिविर स्थल एक विरोध प्रदर्शन के केंद्र में तब्दील हो गया।

आंबेडकर भवन के गेट पर जड़ा ताला, डेढ़ घंटे कैद रहे अधिकारी

शिविर में अपनी समस्या लेकर पहुंचे वार्डवासियों ने जब देखा कि उनकी पट्टे की मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, तो उन्होंने विरोध का अनोखा रास्ता चुना। प्रदर्शनकारियों ने आंबेडकर भवन के मुख्य द्वार पर ताला लटका दिया और अंदर मौजूद सरकारी अमले को बंधक बना लिया। करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारी भवन के भीतर कैद रहे और बाहर आक्रोशित भीड़ नारेबाजी करती रही। इस अचानक हुए घटनाक्रम से पूरे कार्यक्रम में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासनिक व्यवस्था ठप हो गई।

पुलिस ने की सख्ती, 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

हालात बेकाबू होते देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। शुरुआत में पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और ताला खोलने की मिन्नतें की, लेकिन लोग अपनी मांग पर अड़े रहे। जब बातचीत से बात नहीं बनी, तो पुलिस को मजबूरन बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए आंबेडकर भवन का ताला खुलवाया और अंदर फंसे अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

प्रशासनिक सुस्ती पर उठे सवाल, पट्टे को लेकर नाराजगी

डोंगरगढ़ की इस घटना ने सरकारी अभियानों की हकीकत और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पट्टे की फाइलें सालों से धूल फांक रही हैं और सुशासन के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन वक्त रहते उनकी बुनियादी मांगों पर ध्यान देता, तो समाधान शिविर में विवाद की नौबत ही नहीं आती। फिलहाल पूरे इलाके में तनाव बना हुआ है और प्रशासन इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

दूसरी तरफ राहत की तस्वीर: दिव्यांगों को मिली व्हीलचेयर

एक ओर जहां डोंगरगढ़ में विरोध की आग दिखी, वहीं नारायणपुर जिले से सुशासन तिहार की एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई। ग्राम गोहड़ा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया गया। समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण के रूप में व्हीलचेयर बांटी गई। व्हीलचेयर पाकर हितग्राहियों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने शासन का आभार जताया। यहां प्रभारी सचिव ने विभागीय स्टालों का जायजा लिया और अधिकारियों को संवेदनशील होकर काम करने की हिदायत दी।

प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सख्त निर्देश

सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार की कोशिश है कि फाइलों में दबे आवेदनों का मौके पर ही निपटारा हो। नारायणपुर के शिविर में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे हितग्राही मूलक योजनाओं को समय सीमा के भीतर लागू करें। हालांकि, डोंगरगढ़ जैसे मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पट्टा वितरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। अब देखना यह होगा कि इस हंगामे के बाद प्रशासन पट्टा वितरण की प्रक्रिया में कितनी तेजी लाता है ताकि भविष्य में ऐसी टकराव की स्थिति दोबारा न बने।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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