
Gold Silver Price Hike Import Duty India 2026: सोने-चांदी की खरीदारी का मन बना रहे लोगों को आज तगड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार के एक बड़े फैसले के बाद सर्राफा बाजार में जैसे भूचाल आ गया है। बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार शुरू होते ही सोने और चांदी की कीमतें आसमान छूने लगीं। सोने के दाम में एक ही दिन में 11,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, चांदी ने भी सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए 3 लाख रुपये प्रति किलो के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है। बाजार में आई इस अचानक तेजी से निवेशक और आम खरीदार दोनों ही सकते में हैं।
इंपोर्ट ड्यूटी में भारी इजाफा: क्यों बढ़ गए दाम?
बाजार में आई इस धुआंधार तेजी के पीछे सरकार का एक बड़ा आर्थिक फैसला है। मोदी सरकार ने सोने और चांदी पर लगने वाली ‘इंपोर्ट ड्यूटी’ (आयात शुल्क) को 6 फीसदी से सीधे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य विदेशों से आने वाले सोने की खपत को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से मंगाता है और इसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है, इसलिए आयात शुल्क बढ़ने का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है।
कीमतों का नया गणित: सोना और चांदी अब कितने महंगे?
आंकड़ों पर नजर डालें तो मंगलवार को सोना 1,53,442 रुपये पर बंद हुआ था, जो बुधवार सुबह उछलकर 1,64,497 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। महज कुछ घंटों के भीतर सोने की कीमत में 11,055 रुपये का इजाफा हुआ है। चांदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। मंगलवार को चांदी 2.79 लाख रुपये के करीब थी, जो बुधवार को 22,367 रुपये की लंबी छलांग लगाकर 3,01,429 रुपये प्रति किलो के भाव पर जा पहुंची। कीमतों में आया यह बदलाव हाल के वर्षों का सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है।
पीएम मोदी की अपील: क्यों जरूरी है सोने की खरीदारी टालना?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा के दौरान देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की भावुक अपील की थी। प्रधानमंत्री ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का हवाला देते हुए कहा था कि देश के व्यापक हित में फिलहाल सोने की खरीदारी टालना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सोने के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। सरकार के ताजा फैसले को इसी अपील की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
व्यापार घाटा कम करने की कोशिश और विदेशी मुद्रा का संकट
सरकार के इस कड़े कदम के पीछे व्यापार घाटे (Trade Deficit) को नियंत्रित करने की बड़ी रणनीति छिपी है। भारी मात्रा में सोने का आयात करने से भारत का व्यापार संतुलन बिगड़ता है और डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है। विदेशी मुद्रा की बचत करने के लिए सरकार ने आयात को महंगा कर दिया है ताकि लोग सोने में निवेश कम करें। हालांकि, इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिनके घर में शादियां हैं और जो जेवर बनवाने की तैयारी में थे।
शादियों के सीजन पर असर: ग्राहकों और सराफा कारोबारियों की बढ़ी चिंता
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि अचानक आई इस तेजी से शादियों के सीजन में बिक्री प्रभावित हो सकती है। जो लोग गहने खरीदने की योजना बना रहे थे, उन्हें अब अपना बजट दोबारा तय करना होगा। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि वैश्विक परिस्थितियों और सरकारी नीतियों को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे नई कीमतों की लिस्ट चेक करने के बाद ही खरीदारी का निर्णय लें।



