
धमतरी जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY) की जमीनी हकीकत दावों से उलट नजर आ रही है। पात्रता रखने के बावजूद शहर की दर्जनों महिलाओं को 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के लिए सरकारी दफ्तरों और बैंकों की खाक छाननी पड़ रही है। अकेले धमतरी शहर में ही ऐसी 20 से ज्यादा महिलाएं सामने आई हैं जिन्होंने समय पर आवेदन किया लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उनके बैंक खाते में एक फूटी कौड़ी नहीं पहुंची। विभागीय चक्कर काट-काटकर अब इन महिलाओं का सब्र जवाब देने लगा है।
किश्तों का गणित और आवेदन की शर्त
इस योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को पौष्टिक आहार के लिए आर्थिक मदद देना है। नियमों के मुताबिक पहली किश्त के लिए आखिरी माहवारी के 150 दिनों के भीतर आवेदन करना जरूरी होता है। इसके बाद पहली किश्त के रूप में 1 हजार रुपये मिलते हैं। दूसरी और तीसरी किश्त 180 दिनों के अंतराल पर 2-2 हजार रुपये के रूप में दी जाती है। हालांकि धमतरी की कई महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने शुरुआती हफ्तों में ही फॉर्म भर दिया था लेकिन आज तक पहली किश्त भी नसीब नहीं हुई।
कागजी कार्रवाई पूरी फिर भी खाली हाथ
योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड और जच्चा-बच्चा कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज जमा करना अनिवार्य है। इसके साथ ही डॉक्टर से जांच का पर्चा और पासपोर्ट फोटो भी फॉर्म के साथ लगाई जाती है। इतनी जटिल कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी महिलाओं के खाते में राशि नहीं आ रही है। महिलाओं का कहना है कि जब वे दफ्तर जाती हैं तो उन्हें सर्वर की दिक्कत या दस्तावेजों में कमी बताकर टाल दिया जाता है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
केस स्टडी: सुशीला का पांच महीने का इंतजार
धमतरी की रहने वाली सुशीला साहू सिस्टम की इस सुस्ती का जीता-जागता उदाहरण हैं। सुशीला ने बताया कि उन्होंने गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ही योजना के तहत सारे कागज जमा कर दिए थे। अब पांच महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन उन्हें एक भी किश्त नहीं मिली है। अधिकारियों से पूछने पर उन्हें दोबारा आवेदन करने की सलाह दी गई है। सुशीला की तरह कई अन्य महिलाएं भी हैं जो दोबारा फॉर्म भरने के चक्कर में उलझ गई हैं और उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
विभागीय उदासीनता से पनपा आक्रोश
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि मातृत्व वंदना योजना केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है। एक तरफ सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी आवेदनों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। समय पर पैसा न मिलने से गरीब परिवारों को दवाइयों और फल-दूध जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इस उदासीनता के खिलाफ अब पीड़ित महिलाओं ने एकजुट होकर कलेक्टर से शिकायत करने का मन बनाया है।
क्या है समाधान और आगे का रास्ता
जानकारों का मानना है कि पोर्टल पर तकनीकी खराबी और आधार सीडिंग न होना इस देरी की बड़ी वजह हो सकती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि वे शिविर लगाकर लंबित मामलों का निपटारा करें। महिलाओं की मांग है कि जो आवेदन महीनों से अटके हुए हैं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पास किया जाए ताकि उन्हें गर्भावस्था के दौरान ही इस राशि का लाभ मिल सके। फिलहाल महिलाएं इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन उनकी सुध लेगा और अटकी हुई राशि जल्द जारी होगी।



