IIT भिलाई की नई खोज: अब सस्ती होंगी दवाइयां और रोजमर्रा का सामान, भारत सरकार ने दिया पेटेंट

IIT भिलाई के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे जरूरी केमिकल बनाना पहले से बहुत आसान हो गया है। इस नई खोज की मदद से अब कई जरूरी रसायनों को बेहद कम समय और कम खर्च में तैयार किया जा सकेगा। भारत सरकार ने इस महत्वपूर्ण खोज के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों को पेटेंट भी दे दिया है जिससे आने वाले समय में आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

दवाइयों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स की कीमतों में आएगी भारी गिरावट

इस शोध का सबसे बड़ा फायदा दवा बनाने वाली कंपनियों को होगा। जब दवाइयों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत कम होगी तो बाजार में मिलने वाली दवाइयों के दाम भी घटेंगे। इसके अलावा शैम्पू, क्रीम और साबुन जैसे रोजमर्रा के सामान भी सस्ते हो सकते हैं क्योंकि इन चीजों को बनाने में भी इसी तरह के रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे उन लोगों को सबसे ज्यादा मदद मिलेगी जो महंगी दवाइयों की वजह से अपना इलाज कराने में मुश्किल महसूस करते थे।

टर्शियरी अमाइन्स बनाने का मिला पेटेंट और खेती में होगा फायदा

आईआईटी भिलाई के केमिस्ट्री विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आरूप मुखर्जी और उनकी टीम के सदस्य दीप चौधरी ने ‘टर्शियरी अमाइन्स’ नाम के खास केमिकल को बनाने का नया तरीका खोजा है। यह केमिकल न केवल दवाइयों बल्कि खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों के लिए भी बहुत जरूरी है। इस तकनीक के आने से किसानों के लिए कृषि रसायनों की लागत कम हो सकती है जिससे खेती करना अधिक किफायती हो जाएगा और फसलों की सुरक्षा का खर्च भी घटेगा।

पर्यावरण के लिए वरदान साबित होगी यह ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’

आज के समय में जब प्रदूषण एक बड़ी समस्या है तब यह तकनीक पर्यावरण के लिए बहुत अच्छी मानी जा रही है। इस प्रक्रिया में बहुत कम चरणों का पालन करना पड़ता है और बेकार कचरा भी कम निकलता है। इसे एक तरह की ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ कहा जा सकता है क्योंकि यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना रसायनों का उत्पादन करने में सक्षम है। कम प्रदूषण और कम संसाधनों का इस्तेमाल इसे भविष्य के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाता है।

छोटे उद्योगों के लिए खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते

यह नई तकनीक छोटे और मध्यम दर्जे के उद्योगों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। कम निवेश में बेहतर उत्पादन की संभावना होने से छोटे कारोबारी भी बड़े उद्योगों के साथ मुकाबला कर पाएंगे। इससे बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए रोजगार पैदा होने की भी संभावना है। स्थानीय स्तर पर व्यापार को मजबूती मिलने से देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

भविष्य में आम लोगों की जेब पर कम होगा बोझ

डॉ. आरूप मुखर्जी का कहना है कि इस शोध का मुख्य उद्देश्य ऐसी तकनीक बनाना था जो आम लोगों के जीवन को बेहतर बना सके। भविष्य में जब इसे बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियों में लागू किया जाएगा तब मध्यम वर्ग के लोगों की जेब पर खर्च का बोझ कम होगा। यह खोज न केवल विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है बल्कि यह सीधे तौर पर समाज के हर तबके को लाभ पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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