फर्जी जाति प्रमाण पत्र का खेल: छत्तीसगढ़ में 100 से ज्यादा अफसरों पर गिरी गाज, आरक्षण की ‘मलाई’ खाने वालों की सूची तैयार

छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। राज्य सरकार की उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में 100 से अधिक ऐसे अधिकारी और कर्मचारी चिन्हित किए गए हैं, जिन्होंने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का जाली सर्टिफिकेट बनवाकर सरकारी सेवाएं हासिल कीं। ये लोग सालों से न केवल मलाईदार पदों पर बैठे हैं, बल्कि पदोन्नति का लाभ भी उठा रहे हैं। अब सरकार ने इन ‘फर्जी’ साहबों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी पूरी कर ली है।

जांच के घेरे में बड़े अधिकारी: फर्जी आदिवासी बनने का लगा आरोप

जांच समिति की पड़ताल में ऐसे कई रसूखदार नाम सामने आए हैं जिन्होंने खुद को आदिवासी बताकर नौकरी पाई। इनमें संयुक्त संचालक से लेकर एडिशनल चीफ इंजीनियर तक के पद शामिल हैं। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जनजातीय कोटे का लाभ लिया और असली हकदारों का रास्ता रोका। जांच के दायरे में आए प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

  • पद्म भूषण काशी: संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन
  • अंजना नायडू: संयुक्त संचालक, पशुपालन विभाग
  • कविता सोमावार: आदिवासी विकास विभाग
  • एन डब्ल्यू हेनरी: एडिशनल चीफ इंजीनियर, विद्युत वितरण कंपनी
  • बलराम प्रसाद गोंड: कृषि विकास अधिकारी
  • मदनावति सेठ: प्राचार्य, स्कूल शिक्षा विभाग
  • कुंतिदेवी बैगा: ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी
  • संजय जैम्स: सब इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
  • जेपी पडवार: अतिरिक्त संचालक, गृह विभाग
  • अनिल कुमार बच्चन: कार्यपालन अभियंता (EE), पीएचई

एससी कोटे में भी सेंधमारी: इन अधिकारियों पर लटकी तलवार

सिर्फ आदिवासी कोटे में ही नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर भी फर्जीवाड़ा कर कब्जा जमाया गया है। जांच समिति ने पाया कि कई रसूखदारों ने जाली दस्तावेजों के दम पर खुद को एससी वर्ग का साबित किया। इस सूची में रिटायर्ड अधिकारियों से लेकर वर्तमान जोन कमिश्नर तक के नाम शामिल हैं:

  • वासुदेव सिंह चौहान: जोन कमिश्नर, नगर पालिक निगम रायपुर
  • शंकर कुमार सोनवानी: प्रबंधक, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन
  • प्रकाशचंद्र रायकवाड़: रिटायर्ड सहायक संचालक, आवास एवं पर्यावरण
  • ज्योति भांटेकर: तकनीकी शिक्षा विभाग
  • पल्लवी मेश्राम: सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी
  • डॉ. राजकुमार गडपायले: विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि
  • सुखदास नाग: उप वन क्षेत्रपाल
  • शिखा शर्मा: प्राचार्य, उच्च शिक्षा
  • सिद्धार्थ मोतीराम पाटिल: रिटायर्ड रजिस्ट्रार, शिक्षा विभाग
  • नमिता दास: ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी

स्टे ऑर्डर पर सरकार का प्रहार: मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी पाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। कई आरोपी अधिकारी छानबीन समिति के आदेश के खिलाफ अदालत चले गए हैं, जहां से उन्हें तात्कालिक स्टे (स्थगन) मिल गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर इन स्टे ऑर्डर्स को खत्म (Vacate) करने की अपील की है ताकि दोषियों को जल्द से जल्द पद से हटाया जा सके और उनके खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई शुरू की जा सके।

बर्खास्तगी और वसूली की तैयारी: दोषियों के खिलाफ ‘कठोर’ एक्शन

सरकार अब जांच पूरी होने का इंतजार कर रही है, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ एक साथ बड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, फर्जीवाड़ा साबित होने पर अधिकारियों को केवल नौकरी से ही नहीं निकाला जाएगा, बल्कि उनकी पूरी सेवा अवधि के दौरान मिले वेतन और भत्तों की वसूली भी की जा सकती है। इसके साथ ही:

  • दोषी अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआईआर दर्ज होगी।
  • भविष्य में होने वाली किसी भी सरकारी सेवा के लिए उन्हें अपात्र घोषित किया जाएगा।
  • संबंधित विभाग इन पदों को दोबारा विज्ञापित कर पात्र उम्मीदवारों से भरेंगे।
  • प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी।

व्यवस्था में सुधार की मांग: पात्र उम्मीदवारों के हक पर डाका

यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि उन हजारों मेहनती युवाओं के साथ भी अन्याय है जो आरक्षण के दायरे में आने के बावजूद अपात्रों की वजह से नौकरी से वंचित रह गए। अक्सर यह देखा गया है कि लोग कभी दिव्यांग बनकर तो कभी जाली जाति प्रमाण पत्र लगाकर सिस्टम में घुस जाते हैं। जब तक मामला पकड़ में आता है, तब तक वे सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच जाते हैं। इस घोटाले ने प्रमाण पत्र सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है, जिसे अब और अधिक कड़ा और डिजिटल बनाने की जरूरत है।

भविष्य की राह: सत्यापन के लिए बनेगा नया सख्त प्रोटोकॉल

इस बड़े फर्जीवाड़े से सबक लेते हुए राज्य सरकार अब प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में आमूल-चूल बदलाव की तैयारी कर रही है। अब केवल कागजी दस्तावेजों पर भरोसा न कर डिजिटल डेटाबेस और वंशावली सत्यापन को अनिवार्य किया जा सकता है। इसके साथ ही:

  • नौकरी ज्वाइन करने से पहले जाति प्रमाण पत्र का थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन कराया जाएगा।
  • ब्लॉक और तहसील स्तर पर डेटा को आधार से लिंक किया जाएगा।
  • फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वालों के खिलाफ भी गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई होगी।
  • सभी वर्तमान अधिकारियों के जाति प्रमाण पत्रों का रैंडम ऑडिट कराया जाएगा।

Also Read: छत्तीसगढ़ में शर्मनाक खेल: मुर्दे का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनाकर डकारे पैसे, सचिव और पति पर FIR

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button