
छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के साये से बाहर निकालने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से अभियान चला रही हैं। इसी कड़ी में बालोद जिले के लिए साल 2021 एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया, जब इसे आधिकारिक तौर पर ‘नक्सल मुक्त’ जिला घोषित कर दिया गया। एक दौर था जब यहां के जंगलों में बंदूकें गूंजती थीं, लेकिन पुलिस की सक्रियता और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव ने नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, बंदूकों का शोर तो थम गया, लेकिन बालोद की एक बड़ी आबादी आज भी ‘लाल पानी’ की गंभीर समस्या से जूझ रही है। माइंस से निकलने वाला यह प्रदूषित पानी खेतों को बंजर बना रहा है, जिससे मुक्ति का इंतजार अब भी बरकरार है।

खेती पर भारी प्रदूषण: माइंस के जहरीले पानी ने लाल कर दी फसलें
बालोद जिले के आड़ेझर, महामाया, कोपेडेरा और कटरेल जैसे गांवों में रहने वाले किसानों के लिए खेती अब घाटे का सौदा साबित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लौह अयस्क की खदानों से निकलने वाला ‘लाल पानी’ सीधे उनके खेतों में पहुंच रहा है। स्थानीय किसान बताते हैं कि कुमुडक़ट्टा और आसपास के इलाकों में जमीन की रंगत बदल चुकी है। किसान धान या अन्य फसलें तो बोते हैं, लेकिन दूषित पानी की वजह से उत्पादन न के बराबर होता है। कई बार चक्काजाम और विरोध प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन से केवल आश्वासन ही हाथ लगा है।
नक्सलियों का मददगार गिरफ्तार: कारतूस और वर्दी सप्लाई का हुआ था भंडाफोड़
बालोद के नक्सल मुक्त होने की राह में पुलिस ने कई बड़ी गिरफ्तारियां की थीं। जून 2020 में गुंडरदेही के रहने वाले हरिशंकर गेडाम को सुकमा के पास घेराबंदी कर पकड़ा गया था। उसके पास से 303 बोर और एके-47 जैसे हथियारों के करीब 395 राउंड कारतूस बरामद हुए थे। जांच में खुलासा हुआ था कि वह लंबे समय से नक्सलियों को वर्दी, टोपी और अन्य जरूरी सामानों की सप्लाई कर रहा था। इस तरह की नेटवर्क पर चोट करने के बाद ही जिले में नक्सलियों की पकड़ ढीली हुई थी।
विकास की धीमी रफ्तार: मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे वनांचल क्षेत्र
नक्सल मुक्त जिला घोषित होने के चार साल बाद भी कई इलाके आज भी विकास की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। दल्लीराजहरा के महामाया क्षेत्र से लगे गांवों में आज भी सड़क, बिजली और साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। प्रशासन भले ही विकास के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि माइंस प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग आज भी प्रदूषण और अभाव के बीच जीवन बिता रहे हैं। लाल पानी की समस्या को खत्म करना यहां के लोगों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
दहशत का वो दौर: जब माइंस से लूट लिया था 1750 किलो बारूद
बालोद जिले ने नक्सली हिंसा का एक खौफनाक दौर देखा है। 2 मार्च 2008 को महामाया माइंस में करीब 30 वर्दीधारी नक्सलियों ने सीआईएसएफ जवानों को डराकर 1750 किलो बारूद से भरा वाहन लूट लिया था। उसी साल जून में नक्सलियों ने जवानों की पेट्रोलिंग गाड़ी को आईईडी विस्फोट से उड़ा दिया था। इसके अलावा 2010 में एक निर्दोष ग्रामीण की हत्या और 2017 में मुख्यमंत्री की सभा से पहले प्रेशर कुकर बम की बरामदगी जैसी घटनाओं ने इस जिले को हिलाकर रख दिया था।
सीमाओं पर कड़ी निगरानी: पड़ोसी जिलों से घुसपैठ रोकने के लिए सर्चिंग तेज
नक्सल मुक्त होने के बावजूद पुलिस विभाग कोई ढील बरतने के मूड में नहीं है। बालोद जिला कांकेर और राजनांदगांव जैसे संवेदनशील जिलों की सीमा से लगा हुआ है। पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल का कहना है कि हालांकि अब जिले में नक्सलियों की मौजूदगी की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से सीमावर्ती जंगलों में लगातार सर्चिंग की जा रही है। जिला पुलिस की टीम पड़ोसी जिलों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखती है ताकि फिर से कोई घुसपैठ न हो सके।
प्रशासनिक दावा: नक्सलवाद खत्म होने से तेज हुई विकास की दर
पुलिस प्रशासन का मानना है कि नक्सलवाद का खात्मा होने के बाद से जिले में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन आसान हुआ है। अंदरूनी इलाकों में नई सड़कों का निर्माण हो रहा है और स्कूल-अस्पताल जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। पुलिस का दावा है कि सुरक्षा का माहौल बनने से निवेशकों और विकास कार्यों को गति मिली है। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि जब तक लाल पानी की समस्या और रोजगार के अवसर नहीं बढ़ेंगे, तब तक विकास का लाभ उन तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएगा।
बालोद में नक्सली हिंसा की प्रमुख घटनाएं
- 2 मार्च 2008: महामाया माइंस से 1750 किलो बारूद की बड़ी लूट।
- 8 जून 2008: सुरक्षा बलों के वाहन को विस्फोट से उड़ाने की कोशिश।
- दिसंबर 2010: ग्राम नलकसा के निवासी राम भरोसा दुग्गा की हत्या।
- सितंबर 2017: बम्हनी जंगल मार्ग में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए लगाया गया प्रेशर कुकर बम बरामद।
- जून 2020: नक्सलियों को हथियार और रसद सप्लाई करने वाले बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश।



