
धमतरी। जिले के कोलियारी चौक पर ट्रैक्टर चालकों ने सड़क पर बैठकर जोरदार प्रदर्शन किया और चक्का जाम किया। उनका आरोप था कि रेत माफियाओं को शासन-प्रशासन और नेताओं का संरक्षण मिल रहा है, जबकि ट्रैक्टर चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। वे कहते हैं कि अवैध रेत तस्करी करने वाले भारी भरकम हाईवा और ट्रकों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही, लेकिन ट्रैक्टर चालकों को निशाना बनाया जा रहा है।

रेत की अवैध तस्करी पर नहीं हो रही प्रभावी कार्रवाई, ट्रैक्टर वालों को ही बनाया जा रहा निशाना
ट्रैक्टर चालकों का कहना है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग के साथ-साथ कई राजनीतिक नेता रेत माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं। महानदी से रोजाना 300 से 400 हाईवा ट्रक रेत महाराष्ट्र तक ले जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नाम मात्र की है। उन्होंने कागजी कार्रवाई को ही कार्रवाई बताया और असली दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इसी को लेकर ट्रैक्टर यूनियन ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, जिससे लंबी वाहनों की कतारें लग गईं।
प्रशासन मौके पर पहुंचा, लेकिन हालात रहे तनावपूर्ण
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही एसडीएम पीयूष तिवारी, तहसीलदार सूरज बांसोड़, थाना प्रभारी राजेश मरई पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने का प्रयास किया। जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शन के दौरान एक हाईवा ट्रक भाग निकला, जिससे ग्रामीण और भी गुस्साए और उन्होंने जिला खनिज अधिकारी को बुलाने की मांग को लेकर पुनः चक्का जाम कर दिया।

अवैध खनन से गिर रहा महानदी के आसपास के गांवों का जलस्तर
जनपद सदस्य कीर्तन मिनपाल ने आरोप लगाया है कि भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की मिलीभगत से रेत माफिया खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग ही इस पूरी अवैध गतिविधि के लिए जिम्मेदार हैं। अवैध रेत उत्खनन की वजह से महानदी के किनारे बसे गांवों में जल स्तर गिर रहा है, जिससे पेयजल और निस्तारी की गंभीर समस्या पैदा हो रही है।
एसडीएम का जवाब: लगातार हो रही कार्रवाई
धमतरी के एसडीएम पीयूष तिवारी ने कहा कि जहां-जहां अवैध रेत उत्खनन के मामले सामने आते हैं, वहां कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन और खनिज विभाग की टीम लगातार सक्रिय हैं और आगे भी ऐसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई जारी रहेगी।
मामला गहराता जा रहा है, अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन और प्रशासन इस मुद्दे पर कितनी ठोस कार्रवाई करती हैं।



