
Plastic Bottle Liquor Plastic Bottle Liquor Health Risks Research: छत्तीसगढ़ में अब शराब दुकानों पर प्लास्टिक की बोतलों में शराब बिकना शुरू हो गई है। सरकार के इस फैसले के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता जताई है। शोध और डॉक्टरों की राय के मुताबिक, प्लास्टिक की बोतलों में शराब का भंडारण न केवल उसकी गुणवत्ता और स्वाद को प्रभावित करता है, बल्कि यह शरीर के लिए घातक भी साबित हो सकता है। जानकारों का कहना है कि प्लास्टिक के संपर्क में आने वाली शराब धीरे-धीरे जहरीली हो सकती है, जो लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बनेगी।
प्लास्टिक से निकलने वाले जहरीले रसायनों का खतरा
डॉक्टरों और रसायन विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक की बोतलों में जब शराब को लंबे समय तक रखा जाता है, तो इसमें मौजूद अल्कोहल प्लास्टिक के साथ रसायनिक प्रतिक्रिया शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में प्लास्टिक से ‘फ्थेलेट्स’ और ‘बिसफेनॉल ए’ (BPA) जैसे हानिकारक केमिकल रिलीज होते हैं। यह केमिकल शराब में घुल जाते हैं और सेवन के दौरान हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। ये रसायन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं और शरीर के आंतरिक तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हार्मोनल असंतुलन और अन्य गंभीर बीमारियां
शराब में घुलने वाले ये रसायनिक तत्व शरीर में पहुंचकर हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बिसफेनॉल ए और फ्थेलेट्स एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करते हैं, जिससे शरीर के हार्मोन्स का स्तर बिगड़ जाता है। इसके अलावा, नियमित रूप से ऐसी शराब का सेवन करने वालों में प्रजनन संबंधी समस्याएं और अन्य मेटाबॉलिक विकार उत्पन्न होने की आशंका बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि कम समय के लिए प्लास्टिक का उपयोग शायद ठीक हो, लेकिन लंबे समय का स्टोरेज सेहत बिगाड़ सकता है।
कांच की बोतल क्यों मानी जाती है सबसे सुरक्षित?
महंगी और प्रीमियम शराब हमेशा कांच की बोतलों में ही बेची जाती है। इसके पीछे बड़ा वैज्ञानिक कारण यह है कि कांच रसायनिक रूप से ‘निष्क्रिय’ (Inactive) होता है। इसका मतलब है कि यह शराब के साथ किसी भी तरह की रसायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता। कांच की बोतलों में शराब रखने से न तो उसका स्वाद बदलता है और न ही उसमें कोई जहरीला तत्व घुलता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य और शुद्धता के पैमाने पर कांच को प्लास्टिक की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और बेहतर माना जाता है।
धूप और गर्मी बढ़ा देती है जहर की रफ्तार
प्लास्टिक की बोतलों के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि अगर इन्हें धूप या अधिक तापमान वाली जगह पर रखा जाए, तो रसायनों के निकलने की प्रक्रिया और भी तेज हो जाती है। गोदामों या परिवहन के दौरान अगर ये बोतलें गर्मी के संपर्क में आती हैं, तो प्लास्टिक से निकलने वाले हानिकारक तत्व बहुत जल्द शराब में मिल जाते हैं। ऐसे में शराब के शौकीनों को न केवल खराब स्वाद मिलता है, बल्कि वे अनजाने में अधिक मात्रा में रसायनों का सेवन कर लेते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी: 4 से 6 साल में दिखेंगे दुष्प्रभाव
एनआईटी रायपुर के डॉ. कफील अहमद और सीनियर फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. आरके सिंह जैसे जानकारों का मानना है कि प्लास्टिक की गुणवत्ता अच्छी न होने पर खतरा दोगुना हो जाता है। माइक्रो और नैनो प्लास्टिक जब एथिल अल्कोहल के संपर्क में आते हैं, तो रसायनिक क्रिया निश्चित है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसका असर तुरंत महसूस नहीं होता, लेकिन जो लोग नियमित रूप से ऐसी बोतलों वाली शराब का सेवन करते हैं, उनमें 4 से 6 वर्षों के भीतर गंभीर स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं।
सुविधा के चक्कर में सेहत से समझौता?
प्लास्टिक की बोतलें हल्की और सस्ती होती हैं, जिससे परिवहन आसान हो जाता है और लागत कम आती है। यही कारण है कि कई सस्ते ब्रांड इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुविधा और आर्थिक बचत के लिए आम जनता की सेहत से समझौता करना ठीक नहीं है। सरकार के इस फैसले के बाद अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग प्लास्टिक की बोतलों के विकल्प पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा स्वास्थ्य जगत और प्रशासन के बीच बड़ी बहस का कारण बन सकता है।



