
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर: जिले से मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। ग्राम पंचायत चनवारीडांड में सड़क किनारे एक नवजात शिशु लावारिस हालत में एक झोले के अंदर मिला। वन विभाग डिपो के पास सुबह टहलने निकले लोगों ने जब रोने की आवाज सुनी और झोले को खोला, तो उनके होश उड़ गए अंदर एक मासूम नवजात बच्चा था। ग्रामीणों की समय पर सतर्कता और मानवीय संवेदनशीलता के कारण शिशु की जान बच पाई।
ग्रामीणों ने पहुंचाया अस्पताल, शिशु खतरे से बाहर
स्थानीय ग्रामीणों ने बिना देर किए शिशु को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सा टीम ने बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया और उसकी स्थिति को स्थिर तथा सुरक्षित बताया है। डॉक्टरों के अनुसार, शिशु पूरी तरह खतरे से बाहर है और उसे विशेष निगरानी में रखा गया है। फिलहाल बच्चा चिकित्सा टीम की लगातार देखरेख में सुरक्षित है।
पुलिस ने शुरू की जांच, आरोपी की तलाश जारी
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस भी अस्पताल पहुँची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के CCTV फुटेज, स्थानीय लोगों के बयान और अन्य संभावित सुरागों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिशु को किसने और क्यों सड़क किनारे लावारिस छोड़ा।
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लावारिस नवजात छोड़ना कानूनन अपराध
सड़क किनारे नवजात शिशु को छोड़ना न केवल एक अमानवीय कृत्य है, बल्कि यह कानूनन गंभीर अपराध भी है। पुलिस इस मामले में जल्द से जल्द आरोपी का पता लगाने की तलाश में जुटी है, जिसने मासूम को इस कड़ाके की ठंड में लावारिस छोड़ दिया।
मानवीय संवेदनशीलता ने बचाई मासूम की जिंदगी
इस झकझोर देने वाली घटना में स्थानीय लोगों की मानवीय संवेदनशीलता ने ही नवजात को नई जिंदगी दी है। यदि ग्रामीणों ने रोने की आवाज सुनकर समय पर प्रतिक्रिया न दी होती, तो कोई बड़ा अनहोनी हो सकती थी। चिकित्सा टीम की देखरेख में शिशु के सुरक्षित होने से सबने राहत की साँस ली है।
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