Balod Sushasan Tihar: सुशासन तिहार में फूटा किसानों का गुस्सा: ‘खाद है तो मिल क्यों नहीं रही?’, बालोद में अफसरों पर भड़कीं महिला विधायक

Balod Sushasan Tihar: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम करहीभदर में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ के तहत जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए जनसमस्या निवारण शिविर में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब क्षेत्र के किसान अपनी समस्याओं को लेकर उग्र हो गए। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही सोसायटियों में खाद की भारी किल्लत और अघोषित बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों ने शिविर में मौजूद विभागीय अधिकारियों को चारों तरफ से घेर लिया। किसानों के आक्रोश को देखते हुए संजारी बालोद क्षेत्र की कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा भी अपनी सीट से उठकर सीधे अफसरों के सामने जा खड़ी हुईं। विधायक ने भरे मंच से कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और साफ लहजे में चेतावनी दी कि किसानों को गुमराह करना तुरंत बंद किया जाए।

‘नियम नहीं जानती, किसानों को खाद चाहिए’, विधायक ने दी सीधे धरने पर बैठने की चेतावनी

शिविर के दौरान जब अधिकारियों ने खाद की उपलब्धता को लेकर कागजी नियम और आंकड़े गिनाने शुरू किए, तो विधायक संगीता सिन्हा का पारा चढ़ गया। उन्होंने अधिकारियों से दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी तरह के तकनीकी नियम या कागजी बहानों को सुनने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र के एक-एक किसान को उनकी जरूरत के मुताबिक सोसायटियों से पर्याप्त खाद मिलनी चाहिए। विधायक ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र की सेवा सहकारी समितियों में खाद की किल्लत दूर नहीं हुई और बार-बार बिजली गुल होने की शिकायत दोबारा आई, तो वे खुद ग्रामीणों को साथ लेकर जिला मुख्यालय के सामने उग्र धरने पर बैठ जाएंगी।

दिनभर में 9-10 बार गुल हो रही है बत्ती, खैरवाही की महिलाओं ने बयां किया अपना दर्द

इस जनसमस्या निवारण शिविर में ग्राम खैरवाही से बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने बिजली विभाग की लापरवाही का कच्चा चिट्ठा खोला। महिलाओं ने विधायक के सामने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनके इलाके में भीषण गर्मी के इस दौर में दिनभर के भीतर कम से कम 9 से 10 बार अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। बार-बार बत्ती गुल होने से न तो घरों के पंखे और कूलर चल पा रहे हैं और न ही खेतों में सिंचाई के लिए लगे नलकूप (पंप) काम कर रहे हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए विधायक ने बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता को फोन लगाकर तत्काल सुधार करने और बार-बार कटौती रोकने के कड़े निर्देश दिए।

सोसायटियों के चक्कर काट रहे हैं अन्नदाता, किसानों का आरोप- कृषि विभाग बोल रहा है झूठ

शिविर में अपनी बात रखने पहुंचे सांकरा गांव के किसान संतोष धनकर, ऐनुराम और करहीभदर के पुरानीक साहू, लीलेश्वर साहू व जोहन प्रधान ने कृषि विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। किसानों ने गुस्से में कहा कि खरीफ की बोनी का समय सिर पर आ चुका है, लेकिन सोसायटियों में खाद का वितरण बेहद सुस्त और कछुआ रफ्तार से चल रहा है। किसान अपने जरूरी काम छोड़कर सुबह से शाम तक सोसाइटियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जहां से उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है। किसानों ने सीधा आरोप लगाया कि कृषि विभाग के अधिकारी फाइलों में पर्याप्त खाद होने का सफेद झूठ बोलकर सरकार और जनता दोनों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।

कृषि उपसंचालक का दावा- जिले में पर्याप्त भंडारण, सामने रखे खाद उपलब्धता के आंकड़े

चारों तरफ से घिरने के बाद कृषि विभाग के उपसंचालक आशीष चंद्राकर ने मंच से विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने किसानों के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि जिले के गोदामों में खाद का पर्याप्त भंडारण मौजूद है और सोसायटियों को लगातार रैक भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस खरीफ सीजन 2026 के लिए जिले में कुल 68,070 टन खाद भंडारण का लक्ष्य तय किया गया है, जिसके मुकाबले अब तक 38,646 टन खाद का भंडारण किया जा चुका है। इसमें से 18,605 टन खाद का वितरण किया जा चुका है और वर्तमान में सोसायटियों के पास 20,041 टन खाद का बफर स्टॉक शेष बचा हुआ है।

यूरिया और डीएपी का पूरा गणित: जानिए क्या है लक्ष्य, भंडारण और वितरण की हकीकत

कृषि विभाग ने हंगामे के बीच बालोद जिले के भीतर खरीफ फसलों के लिए सबसे जरूरी दो खादों, यूरिया और डीएपी (DAP), की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक आंकड़े जारी किए। विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई पूरी वित्तीय और भौतिक स्थिति नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझी जा सकती है:

खाद का प्रकारकुल तय लक्ष्य (टन में)कुल वास्तविक भंडारण (टन में)अब तक कुल वितरण (टन में)गोदामों में शेष स्टॉक (टन में)
यूरिया (Urea)27,27013,5557,1116,444
डीएपी (DAP)12,0003,5431,6241,919

महज 100 मीटर की दूरी पर शराब दुकान, शराबी करते रहे हुल्लड़, पुलिस के छूटे पसीने

इस पूरे वीआईपी कार्यक्रम और जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान प्रशासनिक कुप्रबंधन की एक और बानगी देखने को मिली। जिस शासकीय परिसर में यह शिविर आयोजित किया गया था, वहां से ठीक 100 मीटर की दूरी पर एक सरकारी देसी-विदेशी शराब दुकान संचालित हो रही थी। दोपहर के समय कई शराबी वहां से शराब पीकर सीधे कार्यक्रम स्थल के भीतर घुस आए और मुख्य मंच पर चढ़ने के लिए हुल्लड़बाजी करने लगे। मंच पर विधायक और जिले के बड़े अधिकारियों की मौजूदगी के बीच इन शराबियों को काबू में करने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे आयोजन में काफी देर तक अव्यवस्था का माहौल बना रहा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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