
Solid Waste Management Policy: छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में 1 अप्रैल 2026 से ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) नियम 2026’ लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित यह नया कानून 10 साल पुराने नियमों की जगह लेगा और अब कचरा फैलाना आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ सकता है। नए नियमों के तहत न केवल आम नागरिकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी, बल्कि नगर निगम और पालिकाओं की जवाबदेही भी तय की गई है। सबसे चौंकाने वाला बदलाव सामाजिक आयोजनों को लेकर है, जहां अब मेहमानों की संख्या और कचरे के निपटान की जानकारी प्रशासन को पहले से देनी होगी।
शादी-पार्टी के लिए नया फरमान: 3 दिन पहले निगम को बताना जरूरी
अगर आप अपने घर या किसी हॉल में शादी, जन्मदिन या कोई भी बड़ा आयोजन कर रहे हैं, तो अब आपको मेहमानों की लिस्ट पर नजर रखनी होगी। नए नियम के मुताबिक, यदि किसी कार्यक्रम में 100 से अधिक मेहमान शामिल हो रहे हैं, तो आयोजक को कार्यक्रम से कम से कम 3 दिन पहले स्थानीय नगर निगम या पालिका को लिखित सूचना देनी होगी। इसका मकसद आयोजन के दौरान निकलने वाले भारी कचरे के प्रबंधन की पूर्व तैयारी करना है। आयोजन स्थल पर गंदगी मिलने या सूचना न देने पर 500 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का ‘ऑन द स्पॉट’ जुर्माना लगाया जा सकता है।
चार बाल्टियों का फॉर्मूला: अब अलग-अलग रंग के डिब्बों में फेंकना होगा कचरा
नए कानून में कचरे को स्रोत पर ही अलग करने (Segregation) को अनिवार्य बना दिया गया है। अब घरों और संस्थानों में कचरा फेंकने के लिए चार अलग-अलग श्रेणियों का पालन करना होगा:
- गीला कचरा: रसोई का बचा खाना, फल और सब्जियों के छिलके (इन्हें खाद बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा)।
- सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु की वस्तुएं (इन्हें रिसाइक्लिंग प्लांट भेजा जाएगा)।
- सैनिटरी कचरा: इस्तेमाल किए गए डायपर, नैपकिन और पट्टियां (इन्हें सुरक्षित लपेटकर अलग रखना होगा)।
- विशेष देखभाल कचरा: खराब बल्ब, बैटरी, पुरानी दवाइयां और पेंट के डिब्बे (इन्हें केवल अधिकृत एजेंसियों को ही देना होगा)।अगर आपने मिश्रित कचरा कचरा गाड़ी को दिया, तो कर्मचारी उसे नहीं उठाएंगे और आप पर जुर्माना भी हो सकता है।
रेहड़ी-पटरी वालों पर भी सख्ती: डस्टबिन रखना हुआ अनिवार्य
सड़क किनारे चाट, गुपचुप या सब्जी बेचने वाले वेंडरों के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब कोई भी वेंडर काम खत्म करने के बाद कचरा सड़क या नाली में नहीं छोड़ सकेगा। हर ठेले वाले को अपने पास डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा और दिन भर का जमा कचरा निगम के निर्धारित डिपो या वाहन में ही डालना होगा। ऐसा न करने पर उनकी दुकान या ठेले पर तत्काल कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम शहर की सड़कों को साफ रखने और नालियों के जाम होने की समस्या को रोकने के लिए उठाया गया है।

बल्क जनरेटर की जिम्मेदारी: होटल और सोसायटियों को खुद निपटाना होगा कचरा
बड़े आवासीय परिसर (Apartments), होटल, अस्पताल, विश्वविद्यालय और मॉल अब ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ की श्रेणी में आएंगे। इन संस्थानों को अब अपने परिसर के भीतर ही कचरे को प्रोसेस करने की व्यवस्था करनी होगी। यानी गीले कचरे से खाद बनाने का काम इन्हें खुद करना होगा और केवल वही कचरा निगम को देना होगा जिसे रिसायकल नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही, नैपकिन और डायपर बनाने वाली कंपनियों पर ‘एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (EPR) लागू होगी, जिससे वे अपने उत्पादों के कचरे के निपटान के लिए आर्थिक रूप से जिम्मेदार होंगी।
कचरा बीनने वालों को नई पहचान: अब पहचान पत्र और वर्दी में दिखेंगे सफाई मित्र
नए नियमों का एक मानवीय पहलू यह है कि अब कचरा बीनने वाले असंगठित कामगारों को औपचारिक सिस्टम का हिस्सा बनाया जाएगा। स्थानीय निकाय इन लोगों का पंजीकरण करेंगे और उन्हें आधिकारिक पहचान पत्र व वर्दी दी जाएगी। इससे उन्हें समाज में सम्मान मिलेगा और वे कचरे की छंटाई में अधिक तकनीकी रूप से मदद कर पाएंगे। लैंडफिल (कचरा डंपिंग यार्ड) पर अब केवल वही कचरा भेजा जाएगा जिसे किसी भी तरह से दोबारा इस्तेमाल या रिसायकल नहीं किया जा सकता, ताकि पहाड़ों की तरह बढ़ते कचरे के ढेरों को कम किया जा सके।
डिजिटल ट्रैकिंग से होगी निगरानी: सेंट्रलाइज्ड पोर्टल रखेगा हर घर पर नजर
सरकार ने इस बार नियमों को कागजों तक सीमित रखने के बजाय तकनीक से जोड़ा है। एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल पोर्टल के जरिए कचरा संग्रहण और उसके निपटान की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। छत्तीसगढ़ के 193 नगरीय निकायों में इसे प्रभावी ढंग से लागू करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि जुर्माने और जागरूकता के मेल से इसे सफल बनाया जाएगा। नागरिकों से अपील है कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने घरों में कचरा अलग करने की आदत डाल लें ताकि भारी जुर्माने से बच सकें और पर्यावरण को भी सुरक्षित रख सकें।



