
रायपुर: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब वे केवल रामकथा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे देश में ‘राष्ट्रकथा’ का अभियान चलाएंगे। महाराज के अनुसार, प्रभु राम भारत की आत्मा में बसते हैं, इसलिए देश की एकता और अखंडता को बचाना सबसे पहला धर्म है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों का समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब इस समस्या को जड़ से खत्म किया जाए। भिलाई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश के वीर जवानों के साहस को नमन किया और प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।
31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म होने का भरोसा: अमित शाह और विजय शर्मा के संकल्प की सराहना
धीरेन्द्र शास्त्री ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त अभियानों पर अपना अटूट विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने जिस तरह का खाका तैयार किया है, उससे यह निश्चित है कि 31 मार्च तक प्रदेश से नक्सलवाद का नासूर पूरी तरह खत्म हो जाएगा। महाराज ने सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाते हुए कहा कि सरकार ने जो तारीख तय की है, वह जरूर पूरी होगी। उन्होंने साफ किया कि यह लड़ाई केवल हथियारों की नहीं बल्कि संकल्प की भी है और इसमें संतों का आशीर्वाद भी सेना के साथ है।
बस्तर में जुटेगा श्रद्धा का सैलाब: 108 कुंडीय महायज्ञ का स्वरूप होगा बेहद खास
नक्सल हिंसा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों की स्मृति में बस्तर की धरती पर एक विशाल 108 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस यज्ञ के स्वरूप के बारे में बताते हुए पंडित शास्त्री ने कहा कि इसके लिए विद्वान ब्राह्मणों की व्यवस्था वे स्वयं करेंगे। यज्ञशाला को सात खंडों में बनाया जाएगा, जो आधुनिक और पारंपरिक कला का मेल होगा। इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य सेना की मजबूती और शहीद परिवारों को सम्मान देना है। यह आयोजन बस्तर के इतिहास में आध्यात्मिक और राष्ट्रवादी चेतना का सबसे बड़ा संगम साबित हो सकता है।
तिरंगे के साये में पूजे जाएंगे शहीद: रक्षा मंत्री और सेना को भेजा जाएगा विशेष निमंत्रण
इस महायज्ञ की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहां शहीद जवानों को ‘देव’ रूप में पूजा जाएगा। यज्ञशाला के सभी कोनों पर तिरंगा लहराएगा और पूरे परिसर में बलिदानी जवानों की तस्वीरें लगाई जाएंगी। धीरेन्द्र शास्त्री ने बताया कि वे स्वयं भारतीय सेना को इस यज्ञ के लिए आमंत्रित करेंगे। उन्होंने राज्य सरकार को जिम्मेदारी दी कि वे केंद्रीय रक्षा मंत्री को इस गौरवशाली कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए न्योता दें। कार्यक्रम के पहले दिन की विशेष आहुति रक्षा मंत्री और शहीद परिवारों के हाथों से संपन्न कराने की योजना तैयार की गई है।
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राजकोष में जमा होगी चढ़ोत्तरी की राशि: सेना के कल्याण के लिए समर्पित होगा पूरा आयोजन
इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर बाबा बागेश्वर ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने घोषणा की कि यज्ञ के दौरान जो भी दान या ‘चढ़ोत्तरी’ आएगी, उसे किसी व्यक्तिगत मद में खर्च करने के बजाय सीधे सेना के राजकोष में जमा किया जाएगा। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि यह आयोजन पूरी तरह से राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित है। महाराज ने कहा कि सामग्री और अन्य स्थानीय व्यवस्थाएं आयोजन समिति द्वारा की जाएंगी, लेकिन मुख्य उद्देश्य सेना के प्रति सम्मान और राष्ट्र की सुरक्षा के संकल्प को मजबूत करना है।



