
CG Petrol Diesel Price VAT Rate: अंतरराष्ट्रीय जार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही तेजी के बीच घरेलू स्तर पर आम जनता को लगातार महंगाई के झटके लग रहे हैं। तेल कंपनियों ने आज एक बार फिर के दामों में बढ़ोतरी कर दी है, जिसके तहत पेट्रोल के रेट में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही सीएनजी की कीमतों में भी 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, लगातार बढ़ती इस तपिश के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आ रही है। केंद्र सरकार अब भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन शासित राज्यों में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष योजना पर काम कर रही है।
NDA शासित राज्यों में डीजल पर वैट घटाने पर मंथन, केंद्र सरकार जल्द जारी कर सकती है निर्देश
लगातार बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार अब राज्यों के समन्वय से टैक्स कटौती का रास्ता तलाश रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा और सहयोगी दलों द्वारा शासित राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) को कम करने को लेकर उच्च स्तरीय विचार-विमर्श शुरू हो चुका है। इस योजना के तहत विशेष रूप से डीजल पर लगने वाले वैट को घटाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। केंद्र सरकार इस संबंध में जल्द ही संबंधित राज्य सरकारों को आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के नागरिकों को प्रति लीटर ईंधन पर एक बड़ी वित्तीय राहत मिल सकती है।
डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर, परिवहन और कृषि लागत बढ़ने से खुदरा महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर
सरकार का पूरा ध्यान इस समय डीजल की कीमतों को कम करने पर इसलिए है क्योंकि इसका सीधा संबंध देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की थाली से है। डीजल महंगा होने से मालभाड़ा बढ़ जाता है, जिससे फल, सब्जियां और राशन जैसी रोजमर्रा की चीजें खुदरा बाजार में महंगी हो जाती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल महीने में देश की थोक मूल्य मुद्रास्फीति 42 महीनों के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि खुदरा मुद्रास्फीति भी 13 महीनों के शीर्ष स्तर 3.48 प्रतिशत को छू चुकी है। भारत में डीजल का सालाना उपभोग लगभग 9.47 करोड़ टन है, जो इसे देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला पेट्रोलियम उत्पाद बनाता है। यही वजह है कि डीजल के दाम नियंत्रित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है।
पिछले महीने केंद्र ने घटाई थी एक्साइज ड्यूटी, अब राज्यों के पाले में है गेंद
ईंधन की कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने भी एक बड़ा कदम उठाया था। तब केंद्र ने अपनी ओर से ली जाने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में भारी कटौती करते हुए डीजल पर इसे 10 रुपये प्रति लीटर घटाकर शून्य कर दिया था, जबकि पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को कम करके 3 रुपये प्रति लीटर पर ला दिया था। इस केंद्रीय कटौती के बाद अब तेल की कीमतों को और नीचे लाने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों के पाले में आ गई है। जिन राज्यों में वैट की दरें बहुत ज्यादा हैं, वहां टैक्स में थोड़ी भी कटौती उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर बड़ी राहत पहुंचाएगी।
देश के विभिन्न राज्यों में डीजल पर लगने वाले वैट (VAT) की मौजूदा स्थिति
भारत के अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्थानीय सरकारों द्वारा वसूले जाने वाले वैट की दरें काफी भिन्न हैं। यही कारण है कि देश के हर शहर में पेट्रोल और डीजल के अंतिम खुदरा दाम अलग-अलग होते हैं। नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि किस राज्य में ईंधन पर कितना प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है:
| रैंक | राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | डीजल पर वैट (VAT %) |
|---|---|---|
| 1 | तेलंगाना | 27% |
| 2 | ओडिशा | 24% |
| 3 | छत्तीसगढ़ | 23% |
| 4 | केरल | 22.76% |
| 5 | आंध्र प्रदेश | 22.25% |
| 6 | असम | 22.19% |
| 7 | महाराष्ट्र | 21% |
| 8 | उत्तर प्रदेश | 17.08% |
| 9 | दिल्ली | 16.75% |
| 10 | बिहार | 16.37% |
| 11 | गुजरात | 14.9% |
| 12 | तमिलनाडु | 11% |
| 13 | मिजोरम | 10% |
| 14 | अरुणाचल प्रदेश | 7% |
| 15 | लद्दाख | 6% (MST) |
| 16 | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 1% |
इस सूची में छत्तीसगढ़ 23 प्रतिशत वैट के साथ देश में तीसरे स्थान पर बना हुआ है। ऐसे में अगर राज्य की वर्तमान सरकार वैट की इन दरों में कटौती करती है, तो स्थानीय मालभाड़े और कृषि क्षेत्र की लागत में बड़ी गिरावट आएगी जिससे पूरे प्रदेश में महंगाई का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।



